नीलाम खानों को जल्द शुरू करना सरकार की प्राथमिकता : मुख्य सचिव

WhatsApp Channel Join Now
नीलाम खानों को जल्द शुरू करना सरकार की प्राथमिकता : मुख्य सचिव


जयपुर, 02 जून (हि.स.)। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा है कि प्रदेश में नीलाम खानों को जल्द परिचालन में लाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां समयबद्ध तरीके से जारी करनी होंगी तथा फेसिलिटेटर की भूमिका निभाते हुए प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाना होगा।

मुख्य सचिव मंगलवार को सचिवालय स्थित चिंतन कक्ष में आयोजित अंतरविभागीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में ऑक्शन खानों को शीघ्र संचालन में लाने, पर्यावरणीय एवं प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने और खनन क्षेत्र में निवेश बढ़ाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि राजस्थान मेजर मिनरल और माइनर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। प्रदेश में अब तक 101 मेजर मिनरल ब्लॉकों की नीलामी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि नीलाम खानों के संचालन से राज्य को केंद्र सरकार से प्रोत्साहन राशि मिलने के साथ-साथ खनन क्षेत्र में निवेश, रोजगार और राजस्व के नए अवसर विकसित होंगे।

इससे प्रदेश के बहुमूल्य खनिजों का वैधानिक खनन भी तेज गति से शुरू हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि स्वीकृति प्रदान करने वाली एजेंसियों और विभागों को केवल नियामक नहीं बल्कि सहयोगी और फेसिलिटेटर की भूमिका निभानी होगी, ताकि खनन परियोजनाएं समय पर शुरू हो सकें। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने स्टेट लेवल एनवायरमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सीया) को निर्देश दिए कि ऑक्शन खानों को पर्यावरणीय स्वीकृति जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

उन्होंने कहा कि आवश्यक दस्तावेज और औपचारिकताएं एक बार में ही पूरी कराई जाएं तथा स्पष्ट टाइमलाइन बनाकर प्रकरणों का निस्तारण किया जाए।

उन्होंने सीया से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने तथा संबंधित पक्षों को मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करने के निर्देश भी दिए। बैठक में मुख्य सचिव ने वन विभाग को निर्देशित किया कि वन एनओसी, वाइल्ड लाइफ सेंक्चुरी और इकोलॉजिकल सेंसिटिव जोन से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां पोर्टल पर अपलोड की जाएं, ताकि खनन कंपनियों को समय पर जानकारी मिल सके और अनुमतियों की प्रक्रिया तेज हो सके।

खनिज परिवहन वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने डंपर और अन्य वाहनों में स्पीड गवर्नर अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए। साथ ही खनिज परिवहन वाहनों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लगाकर उसे खान विभाग और परिवहन विभाग से एकीकृत करने पर भी जोर दिया।

अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं पेट्रोलियम अर्पणा अरोरा ने बैठक में बताया कि ऑक्शन खानों को परिचालन में लाना खान विभाग के सामने बड़ी चुनौती है। इसके लिए पर्यावरण, वन, राजस्व सहित कई विभागों से अनुमतियां लेनी पड़ती हैं, जिनमें देरी होने से परियोजनाएं प्रभावित होती हैं। उन्होंने कहा कि समय पर स्वीकृतियां मिलने से न केवल वैध खनन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य सरकार के राजस्व में भी वृद्धि होगी।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव नगरीय विकास आलोक गुप्ता ने भी विभिन्न सुझाव दिए। प्रमुख सचिव परिवहन भवानी सिंह देथा ने बताया कि विभाग इंटरसेप्टर वाहनों के माध्यम से निर्धारित गति सीमा से अधिक तेज चलने वाले वाहनों पर कार्रवाई कर रहा है। सीया अध्यक्ष मुनीश गर्ग ने आश्वस्त किया कि स्वीकृतियों के निस्तारण में और अधिक तेजी लाई जाएगी।

बैठक में विशिष्ट सचिव माइंस नम्रता वृष्णि, एसएस फॉरेस्ट सुदर्शन, सीया सदस्य सचिव विजय एन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

Share this story