चांदपोल के रामचंद्रजी मंदिर में दशहरे पर सजेगा ठाकुरजी का राजसी दरबार

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चांदपोल के रामचंद्रजी मंदिर में दशहरे पर सजेगा ठाकुरजी का राजसी दरबार


चांदपोल के रामचंद्रजी मंदिर में दशहरे पर सजेगा ठाकुरजी का राजसी दरबार


जयपुर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। विजयादशमी पर चांदपोल बाजार स्थित ठिकाना मंदिर श्री रामचंद्रजी में मंगलवार को शस्त्र पूजन किया जाएगा। रियासत काल से चली आ रही परंपरा के अनुसार शाम 6 बजे मंत्रोच्चार के साथ महंत परिवार की ओर से आयुधों की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस अवसर पर हवाई आतिशबाजी भी होगी। मंदिर में दशहरे पर विशेष राजसी दरबार सजाया जाएगा, जिसमें ठाकुरजी को रजवाड़ी पोशाक धारण करवाई जाएगी और प्राचीन शस्त्रों को सजाया जाएगा।

महंत नरेंद्र तिवाड़ी ने बताया कि मंदिर में धनुष, बाण, तलवार, खड्ग, कटार, नख, भाला, गदा, बंदूक और फरसा सहित विभिन्न आयुधों का विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जयपुर में इस मंदिर में रियासतकाल से विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा निभाई जा रही है। शस्त्रों को सुरक्षित रखने के लिए मंदिर में अलग से शस्त्रागार भी बना हुआ है।

10 किलो का चांदी का धनुष, आठ किलो की खड्ग

मंदिर के शस्त्रागार में कई प्राचीन और ऐतिहासिक आयुध सुरक्षित हैं। इनमें करीब 10 किलो वजन और तीन फीट लंबा धनुष प्रमुख है, जिसे वर्ष 1882 में माजी साहब गुलाब कंवर ने भेंट किया था। मंदिर में करीब आठ किलो वजन की दोधारी खड्ग और पांच किलो वजन की चांदी की तलवार भी है। तलवार नरेश माधो सिंह ने भेंट की थी।

इसके अलावा सूर्य चिह्न वाली काठ की बंदूक भी है, जिसे राजा भवानी सिंह ने भेंट किया था। मंदिर में 10 फीट लंबे भाले, सिंहमुख गदा और चांदी चढ़े लठ सहित अन्य आयुध भी मौजूद हैं। ठाकुरजी को धारण करवाए जाने वाले प्रमुख शस्त्रों में चांदी से निर्मित धनुष, खड्ग, कटार और फरसा शामिल हैं।

साल में एक बार सजता है राजसी दरबार

महंत नरेंद्र तिवाड़ी के अनुसार वर्ष में केवल विजयादशमी के दिन ठाकुरजी का विशेष राजसी दरबार सजाया जाता है। इस अवसर पर ठाकुरजी को रजवाड़ी पोशाक धारण करवाई जाती है और शस्त्रों को विशेष रूप से सजाकर पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार, शस्त्रागार में सुरक्षित आयुधों को इसी दिन बाहर निकालकर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा जाता है।

विजयादशमी के अवसर पर मंदिर में भक्त समाज की ओर से बधाई उत्सव भी मनाया जाएगा। शस्त्र पूजन और राजसी परंपराओं के माध्यम से मंदिर में दशहरे का पर्व पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Livevns.news Desk
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