साधु-संतों के वेश में प्रदर्शन पर मेवाड़ के संतों का आक्रोश

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साधु-संतों के वेश में प्रदर्शन पर मेवाड़ के संतों का आक्रोश


साधु-संतों के वेश में प्रदर्शन पर मेवाड़ के संतों का आक्रोश


उदयपुर, 3 अगस्त (हि.स.)। संसद परिसर में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान साधु-संतों का वेश धारण किए जाने को लेकर मेवाड़ के संत समाज में नाराजगी देखने को मिली। इस मामले के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में साधु-संत उदयपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए सांसद पप्पू यादव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान संतों ने कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी करते हुए सांसद पप्पू यादव और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विरोध जताया। संतों का कहना था कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर साधु-संतों का वेश धारण कर राजनीतिक प्रदर्शन करना सनातन परंपरा और संत समाज की गरिमा के विपरीत है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संत इंद्रदास महाराज ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे अथवा दान से जुड़े किसी भी कथित अनियमितता की निष्पक्ष जांच और विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि किसी मुद्दे का विरोध करने के लिए साधु-संतों का भेष धारण कर संसद परिसर में नाटकीय प्रदर्शन करना उचित नहीं है और इससे संत परंपरा का अपमान हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए बार-बार भगवा वस्त्र और संत समाज की छवि का उपयोग किया जा रहा है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं। संत समाज ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कर दोषियों के विरुद्ध संवैधानिक और कानूनी कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन में साधु-संतों ने राष्ट्रपति से सांसद पप्पू यादव की संसद सदस्यता समाप्त करने की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि यदि इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो मेवाड़ के विभिन्न अखाड़ों और संत समाज के प्रतिनिधि प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।

प्रदर्शन में शामिल संतों ने कहा कि लोकतांत्रिक विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी भी धर्म, संप्रदाय या संत परंपरा का उपहास उड़ाना स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने सरकार से धार्मिक प्रतीकों और संत समाज की गरिमा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की भी मांग की।

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

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