प्रदेश की 93 खनन लीज रद्द करने का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
जयपुर, 28 मई (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ की ओर से 20 जनवरी 2026 के आदेश के जरिए प्रदेश के चार जिलों भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर व अजमेर के करीब 93 बजरी खनन पट्टों के ई-नीलामी आदेश को रद्द करने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की एसएलपी पर सुनवाई करते हु़ए संबंधित पक्षकारों से जवाब देने के लिए कहा है। वहीं सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में रखी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने भी फिलहाल खनन लीज़ धारकों एवं एलओआई धारकों को खनन नहीं करने के निर्देश दिए हैं।
राज्य सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और प्रदेश की ओर से एएजी शिवमंगल शर्मा उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 20 जनवरी 2026 के आदेश में सीईसी रिपोर्ट की गलत व्याख्या करते हुए टोंक, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर एवं अजमेर जिलों की 93 ई-ऑक्शन खनन लीज़ों को रद्द कर दिया, लेकिन ये सभी लीज़ साल 2023 की नई एसओपी और संशोधित नियामकीय व्यवस्था के तहत जारी की गई थीं और इनमें पर्यावरणीय सुरक्षा, रीप्लेनिशमेंट स्टडी एवं डीएसआर जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में पारित आदेशों और सीईसी रिपोर्ट के दायरे का विस्तार करते हुए नई व्यवस्था पर पुरानी शर्तें लागू कर दीं। जबकि मौजूदा 93 लीज़ें पूर्व के 82 एलओआई मामलों से पूरी तरह अलग हैं। दूसरी ओर हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले समूह ने राज्य सरकार की एसएलपी का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर मामले के संबंधित पक्षकारों से जवाब देने के लिए कहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक

