राजस्थान में बढ़ी मानसूनी बारिश, लेकिन गर्मी और जलवायु जोखिम भी बढ़े : सीईईडब्ल्यू
जयपुर, 05 अगस्त (हि.स.)। क्लाइमेट थिंक टैंक काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने बुधवार को जयपुर में आयोजित एक राउंडटेबल बैठक में अपने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित क्लाइमेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ‘क्रेविस एआई’ के माध्यम से राजस्थान में जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत किए।
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 1981-2010 की तुलना में 2011-2024 के दौरान राजस्थान में औसत मानसूनी वर्षा में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में राज्य की औसत मौसमी वर्षा 471 मिमी से बढ़कर 598 मिमी हो गई है। हालांकि वर्ष 2051-2070 के दौरान औसत वर्षा 569 मिमी रहने का अनुमान है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वर्षा में वृद्धि के बावजूद राज्य में गर्मी और जलवायु परिवर्तनशीलता लगातार बढ़ रही है। अनुमान के अनुसार 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले दिनों की संख्या वर्ष 2031-2050 तक बढ़कर औसतन 176 दिन प्रतिवर्ष और वर्ष 2051-2070 तक 185 दिन प्रतिवर्ष हो सकती है। इसके साथ ही रात्रिकालीन तापमान में भी उल्लेखनीय वृद्धि की आशंका जताई गई है।
सीईईडब्ल्यू के अनुसार ‘क्रेविस एआई’ पिछले 40 वर्षों के जलवायु आंकड़ों और वर्ष 2070 तक के पूर्वानुमानों के आधार पर जिला स्तर पर 279 जलवायु संकेतकों का विश्लेषण करता है। यह प्लेटफॉर्म भारत मौसम विज्ञान विभाग, भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण सहित विभिन्न संस्थानों के प्रमाणिक आंकड़ों पर आधारित है। इसका उपयोग जलवायु जोखिम आकलन, आपदा प्रबंधन और नीतिगत निर्णयों में किया जा सकता है।
सीईईडब्ल्यू के फेलो डॉ. विश्वास चितले ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म नीति-निर्माताओं, शहरी योजनाकारों और अन्य हितधारकों को स्थानीय स्तर पर जलवायु संबंधी निर्णय लेने, हीट एक्शन प्लान तैयार करने, बुनियादी ढांचे की योजना बनाने तथा आपदा प्रबंधन की प्रभावी रणनीति विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

