राजस्थान को जैविक प्रदेश बनाने का राज्यपाल के समक्ष रखा प्रस्ताव

WhatsApp Channel Join Now
राजस्थान को जैविक प्रदेश बनाने का राज्यपाल के समक्ष रखा प्रस्ताव


जयपुर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। राजस्थान को जैविक कृषि के क्षेत्र में अग्रणी प्रदेश बनाने के उद्देश्य से ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ओएफपीएआई) के चेयरमैन एवं अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से राजभवन में शिष्टाचार भेंट की। दीपावली की शुभकामनाओं के साथ प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को गौमाता का शुद्ध देसी घी और गोबर से निर्मित पर्यावरण अनुकूल दीपक भेंट किए।

प्रतिनिधिमंडल में मधुसूदन दाधीच, आर.पी. जाट और अंकित आचार्य मौजूद रहे। मुलाकात के दौरान जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, जैविक कृषि के विस्तार और किसानों की समृद्धि जैसे विषयों पर चर्चा हुई। डॉ. गुप्ता ने राज्यपाल के समक्ष राजस्थान को देश के अग्रणी जैविक प्रदेश के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विशाल कृषि भूमि, समृद्ध पशुधन, परंपरागत कृषि पद्धतियों और औषधीय पौधों की खेती की संभावनाएं हैं। इनके समन्वित उपयोग से राजस्थान जैविक कृषि का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है।

डॉ. गुप्ता ने राज्यपाल से आग्रह किया कि राजस्थान सरकार जैविक कृषि के विस्तार के लिए व्यापक और दीर्घकालीन नीति तैयार करे। साथ ही इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी रखा जाए, ताकि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से टिकाऊ कृषि विकास को गति मिल सके।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन, मिट्टी की घटती उर्वरता, जल संकट और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों की उपलब्धता को गंभीर चुनौतियां बताते हुए कहा कि अनियमित वर्षा और बढ़ते तापमान का असर कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना जरूरी है।

डॉ. गुप्ता ने गौशालाओं को जैविक खाद उत्पादन, कृषि प्रशिक्षण, महिला स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशी गौवंश आधारित जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य कृषि उपयोगी उत्पादों के उत्पादन से किसानों को स्थानीय स्तर पर संसाधन मिल सकेंगे। इससे गौ-संरक्षण के साथ ग्रामीण रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी विकसित होंगी।

उन्होंने कहा कि जैविक कृषि, गौ-संरक्षण और ग्रामीण उद्यमिता के माध्यम से राजस्थान टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है। इसके लिए सरकार, किसान संगठनों, गौशालाओं और कृषि अनुसंधान संस्थानों के बीच समन्वय जरूरी है। 'जैविक राजस्थान, स्वस्थ भारत और समृद्ध किसान' का संकल्प पर्यावरण संरक्षण, सुरक्षित खाद्य उत्पादन और ग्रामीण आत्मनिर्भरता को मजबूत आधार दे सकता है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

769668 Articles

Share this story