छोटी काशी में राधाष्टमी पर बही भक्ति की रसधार: मंदिरों में गूंजे राधारानी के जयकारे
जयपुर, 19 सितंबर (हि.स.)। छोटी काशी जयपुर में शनिवार को वृषभान दुलारी श्री राधारानी का प्राकट्य दिवस राधाष्टमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। शहर के कृष्ण मंदिरों में सुबह से ही भक्तिमय माहौल रहा। मंदिरों में पंचामृत अभिषेक, विशेष श्रृंगार, पालना और चरण दर्शन के साथ बधाई गान हुए। श्रद्धालु राधारानी के जयकारे लगाते हुए मंदिरों में पहुंचे। कई मंदिरों में वर्ष में एक बार होने वाले राधारानी के चरण दर्शन भी श्रद्धालुओं को हुए।
जयपुर के आराध्य ठाकुर श्री गोविंददेवजी मंदिर में राधाष्टमी का मुख्य उत्सव धूमधाम से मनाया गया। तड़के 4 बजे मंगला झांकी के साथ विशेष दर्शन शुरू हुए। सुबह 4:45 बजे ठकुरानी श्री राधारानी का पंचामृत अभिषेक हुआ। इसमें 111 किलो दूध, 51 किलो दही, 31 किलो बूरा, 6 किलो घी और 6 किलो शहद का उपयोग किया गया। पांच वेदपाठी ब्राह्मणों ने वेदपाठ के बीच अभिषेक कराया। इससे पहले महंत अंजन कुमार गोस्वामी ने तिथि पूजन किया, जिसके बाद महाआरती के दर्शन हुए।
राधारानी को पंजीरी, लड्डू और मावे की बर्फी का भोग लगाया गया। राजभोग झांकी से पहले सादा चावल, मीठा चावल, नमकीन चावल, खिचड़ी, दाल, गट्टे की सब्जी, आलू-खसखस, आलू-परवल, सूखी अरबी, खीर, पनीर की सब्जी, पकोड़ी की सब्जी, आलू-मंगोड़ी की सब्जी, बैंगन-आलू-कोला और मिर्च-बैंगन सहित विभिन्न व्यंजनों का कच्चा भोग अर्पित किया गया। इसके बाद छप्पन भोग झांकी के दर्शन हुए।
राधाष्टमी पर ठाकुर श्री गोविंददेवजी का भी विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें पीली-गुलाबी लप्पा जामा पोशाक, विशेष अलंकार, आभूषण और सिरपेच धारण कराया गया। सुबह 7:45 बजे धूप झांकी और इसके बाद श्रृंगार झांकी के दर्शन हुए। मंदिर परिसर में कोलकाता से मंगाए गए विशेष फूलों से ‘बरसाना महल फूल बंगला’ झांकी सजाई गई। शाम 7 से रात 8:30 बजे तक विशेष उत्सव दर्शन हुए, इसके बाद शयन झांकी के दर्शन हुए।
गोविंददेवजी मंदिर में राधाष्टमी उत्सव की पांच दिवसीय श्रृंखला 14 सितंबर से चल रही थी। मंदिर को बंधनवार, बधाई संदेशों और विद्युत रोशनी से सजाया गया। उत्सव के दौरान भजन मंडलियों और कलाकारों ने ठाकुरजी के समक्ष राग एवं नृत्य सेवा अर्पित की।
दरीबा पान स्थित श्री शुक संप्रदाय आचार्य पीठ, श्री सरस निकुंज में भी राधाष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्री शुक संप्रदाय पीठाधीश्वर अलबेली माधुरी शरण जी महाराज के सान्निध्य में सुबह नित्य सेवा के बाद ठाकुर श्री राधासरस बिहारी जू सरकार का पंचामृत अभिषेक कर मनोरम श्रृंगार किया गया। शाम को श्री सरस परिकर की ओर से प्रिया जी यानी श्री राधारानी के प्राकट्य की खुशी में बधाई उछाल एवं बधाई का चाव हुआ।
इसी अवसर पर आचार्य महाप्रभु श्री स्वामी श्याम चरणदास जी महाराज का छठी उत्सव भी मनाया गया। छठी पूजन के तहत चौक पुरवाई और गोद भराई का भाव हुआ तथा छठी पूजन की पदावलियों का गायन किया गया। इसके साथ ही आचार्य महाप्रभु के जयंती महोत्सव का विश्राम हुआ।
राधाष्टमी पर गुप्त वृन्दावन धाम में भी भव्य महोत्सव हुआ। वृन्दावन गार्डन में विशेष पंडाल सजाया गया, जहां श्री श्री राधारमण जी का पंचामृत से महाअभिषेक, महाआरती और विशेष कथा हुई। भगवान को 56 भोग अर्पित किया गया। जयपुरभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं से पूरा परिसर ‘राधा रानी की जय, महारानी की जय’ के जयघोष से गूंज उठा।
इस अवसर पर 12 घंटे अखंड हरिनाम संकीर्तन हुआ। वर्ष में एक बार राधाष्टमी पर श्री श्री राधारमण जी अपने मुख्य मंदिर, जो गोविंददेवजी मंदिर के समीप चारदीवारी क्षेत्र में स्थित है, से गुप्त वृन्दावन धाम पधारते हैं।
मंदिर अध्यक्ष अमितासना दास ने कहा कि श्रीकृष्ण सर्व-आकर्षक हैं, लेकिन श्रीमती राधारानी अपने प्रेम से श्रीकृष्ण को भी आकर्षित करती हैं। गौड़ीय वैष्णव परंपरा में राधारानी की कृपा का विशेष महत्व है और उनकी कृपा से भगवान श्रीकृष्ण की शरण प्राप्त करना सहज माना जाता है।
पुरानी बस्ती के राधा गोपीनाथजी में महंत सिद्धार्थ गोस्वामी के सान्निध्य में राधाष्टमी मनाई गई। चौड़ा रास्ता स्थित राधा दामोदरजी मंदिर में महंत मलय गोस्वामी के सान्निध्य में उत्सव हुआ। चौड़ा रास्ता के मदन गोपालजी, चांदनी चौक के बृज निधिजी, आनंद कृष्ण बिहारीजी, रामगंज चौपड़ के मुरली मनोहरजी और बनीपार्क के राधा-कृष्ण मंदिर सहित शहर के अन्य कृष्ण मंदिरों में भी राधाष्टमी पर विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, पालना दर्शन, चरण दर्शन, भानोत्सव, बधाई उछाल और भक्ति संध्या के आयोजन हुए।
आनंद कृष्ण बिहारी मंदिर के पुजारी मातृ प्रसाद शर्मा ने बताया कि मान्यता के अनुसार भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को राजा वृषभानु को राधारानी नवजात कन्या के रूप में प्राप्त हुई थीं। राधारानी को भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिय माना जाता है और राधाष्टमी पर उनके बाल स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। इसी कारण कई मंदिरों में वर्ष में एक बार राधाष्टमी पर राधारानी के चरण दर्शन की परंपरा भी निभाई जाती है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

