शीतलहर व पाले से रबी फसलों के बचाव हेतु किसान करें उपयुक्त उपाय
बीकानेर, 11 जनवरी (हि.स.)। आगामी दिनों में तापमान में गिरावट होने की संभावना के मद्देनजर सरसों, चना, गेहूं, उद्यानिकी सब्जियों व बगीचों में शीतलहर व पाले से नुकसान होने की संभावना है।
संयुक्त निदेशक कृषि मदनलाल ने बताया कि सर्दी के मौसम में जिस दिन दोपहर के पहले ठंडी हवा चल रही हो व हवा का तापमान अत्यंत कम होने लग जाए एवं दोपहर बाद अचानक हवा चलना बंद हो जाए तब पाला पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। पाले के कारण पौधों की कोशिकाओं में उपस्थित जल जमने से कोशिका भित्ति फट जाती है, जिससे पौधे की पत्तियां, कोंपले, फूल, फल क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि किसान रबी फसलों, उद्यानिकी सब्जियों व फल बगीचों को पाले से बचाने हेतु फसल पर पाला पड़ने की संभावना दिखाई देते ही घुलनशील गंधक 0.2 प्रतिशत 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव कर सकते हैं। यदि पाला लगातार पड़ रहा हो तो 15 दिन में पुनः छिड़काव करें।
रबी फसलों को पाले से बचाव हेतु थायोयूरिया 500 पीपीएम आधा ग्राम प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें। सरसों, गेहूँ, चना, आलू, मटर जैसी फसलों को पाले से बचाने में गन्धक का छिड़काव करने से न केवल पाले से बचाव होता है, बल्कि पौधों में लौहा तत्व की जैविक एवं रासायनिक सक्रियता बढ़ जाती है जो पौधों में रोग रोधिता बढ़ाने में एवं फसल को जल्दी पकाने में सहायक होती हैं।
पाला पड़ने की संभावना हो तो फसलों में हल्की सिंचाई की सलाह करें ताकि जमीन का तापमान एकदम से कम न हो। नमीयुक्त जमीन में काफी देरी तक गर्मी रहती है तथा भूमि का तापक्रम एकदम कम नहीं होता है। जिससे तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे नही गिरेगा और फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।
नवस्थापित फलदार बगीचों में पौधों को पाले से बचाने हेतु टाट, बोरी या घासफूस आदि से ढ़ककर या टाटी बनाकर सुरक्षा करें। यह उपाय अपनाकर किसान भाई अपनी फसलों को पाले के नुकसान से बचा सकते हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

