राजस्थानी के मूर्धन्य विद्वान थे प्रो. सोनाराम बिश्नोई

राजस्थानी के मूर्धन्य विद्वान थे प्रो. सोनाराम बिश्नोई
राजस्थानी के मूर्धन्य विद्वान थे प्रो. सोनाराम बिश्नोई


बीकानेर, 9 जून (हि.स.)। राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के पूर्व अध्यक्ष तथा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के पूर्व राजस्थानी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सोनाराम बिश्नोई राजस्थानी के मूर्धन्य विद्वान थे। उन्होंने राजस्थानी भाषा, साहित्य, इतिहास, संस्कृति के क्षेत्र में अविस्मरणीय कार्य किया। अकादमी अध्यक्ष के रूप में उन्होंने अनेक नवाचार किये। वे राजस्थानी की मान्यता के लिये सदैव प्रयासरत रहे। उन्होंने लोकदेवता बाबा रामदेव के विषय में महत्त्वपूर्ण शोध कार्य किया। वे जाम्भाणी साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान थे। उनके द्वारा लिखित अनेक पुस्तकें देश-प्रदेश स्तर पर चर्चित हुईं। वे लोकप्रिय शिक्षक भी थे। उनका निधन राजस्थानी भाषा, साहित्य के लिये अपूरणीय क्षति है। वे देश-प्रदेश की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं से सम्बद्ध रहे। उन्होंने अपनी हजारों पुस्तकों-पत्रिकाओं को जाम्भाणी साहित्य अकादमी बीकानेर को भेंट किया।

ये विचार साहित्यकारों ने रविवार को राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की ओर से प्रो. डॉ. सोनाराम बिश्नोई की पावन स्मृति में अकादमी सभागार में आयोजित श्रद्धांजलि-सभा में व्यक्त किये। इस दौरान प्रो. भँवर भादाणी, कमल रंगा, पृथ्वीराज रतनू, शरद केवलिया, सुधा आचार्य, मोनिका गौड़, मुकेश व्यास, शंकरसिंह राजपुरोहित, प्रो. नरसिंह बिनानी, कासिम बीकानेरी, अब्दुल शकूर सिसोदिया, जुगल पुरोहित, केशव जोशी, श्रीनिवास थानवी, इन्द्र कुमार छंगाणी, सुशील छंगाणी, कानसिंह, मनोज मोदी, रामअवतार तिवाड़ी आदि ने स्वर्गीय बिश्नोई को पुष्पांजलि अर्पित की तथा उनकी स्मृति में दो मिनट का मौन रखा।

हिन्दुस्थान समाचार/राजीव/ईश्वर

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