प्रसार, शोध एवं नवाचारों से किसानों एवं पशुपालकों में विकासशील परिवर्तन
बीकानेर, 07 जनवरी (हि.स.)। वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर एवं उपनिदेशक कृषि एवं पदेन परियोजना निदेशक (आत्मा) हनुमानगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आत्मा योजनान्तर्गत अन्तर्राज्य पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन बुधवार को हुआ।
प्रसार शिक्षा निदेशालय द्वारा आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन सत्र के मुख्य अतिथि विधायक, खाजुवाला व विश्वविद्यालय प्रबंध मण्डल के सदस्य डॉ. विश्वनाथ मेघवाल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने की।
मेघवाल ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में कृषि एवं पशुपालन, पशुपालकों की आजिविका का मुख्य व्यवसाय है। राजस्थान के मरूस्थली क्षेत्रों में मौसम की विपरित परिस्थितियों में पशुपालन किसानों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। कृषि एवं वेटरनरी विश्वविद्यालय के दशकों से प्रसार, नवाचार एवं शोध परिणामों से इस क्षेत्र में कृषि एवं पशुपालन को सुदृढता मिली है जिसके परिणाम स्वरूप कृषकों को स्वरोजगार एवं आर्थिक स्वावलम्बन मिला है विकासशील परिवर्तन देखने को मिला है।
कुलगुरु डॉ. सुमन्त व्यास, निदेशक प्रसार शिक्षा प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने भी विचार रखे।
कार्यक्रम के दौरान “उन्नत पशुपालन तकनीक” विषय पर प्रशिक्षण संदर्शिका एवं “पशुपालन नये अयाम” हिन्दी मासिक पत्रिका के नवीन अंक का विमोचन भी किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

