रियासती रेलवे विरासत से रूबरू हुई नई पीढ़ी
जोधपुर, 18 अपै्रल (हि.स.)। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल कैरेज वर्कशॉप में शनिवार को विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी केवल मॉडल्स का प्रदर्शन भर नहीं रही, बल्कि यह भारतीय रेल के गौरवशाली अतीत की जीवंत झलक बनकर सामने आई।
मुख्य कारखाना प्रबंधक रवि मीणा ने बताया कि जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी के निर्देशानुसार आयोजित इस प्रदर्शनी में विशेष रूप से रियासती कालीन रेलवे से जुड़े मॉडल्स को प्रदर्शित किया गया। ये मॉडल उस दौर की कहानी कहते हैं जब मारवाड़ क्षेत्र में रेल केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम बनी थी। इतिहास पर नजर डालें तो जोधपुर रियासत में रेलवे की शुरुआत 19वीं सदी के उत्तराद्र्ध में हुई जब मारवाड़ राज्य ने अपने व्यापारिक हितों और सामरिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए रेल नेटवर्क का विकास शुरू किया।
जोधपुर-बीकानेर रेलवे उस समय की प्रमुख रियासती रेल प्रणालियों में से एक थी, जिसने पश्चिमी राजस्थान को देश के अन्य हिस्सों से जोडऩे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऊंटों और बैलगाडिय़ों पर निर्भर क्षेत्र में रेल के आगमन ने व्यापार, विशेषकर नमक, ऊन और मसालों के परिवहन को नई गति दी।
प्रदर्शनी में प्रदर्शित स्टीम इंजनों, पुरानी बोगियों और स्टेशन संरचनाओं के मॉडल्स ने उस युग की तकनीकी कुशलता और स्थापत्य कला को भी उजागर किया। उस समय के लोकोमोटिव न केवल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण थे, बल्कि वे उस युग की औद्योगिक क्रांति के प्रतीक भी माने जाते थे। प्रदर्शनी में बॉम्ब शैल विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। वर्ष 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कार्यशाला में आवश्यकता अनुसार बॉम्ब शैल और अन्य सैन्य उपकरणों का उत्पादन किया गया था, जो उस समय रेलवे की बहुआयामी भूमिका को दर्शाता है। इस ऐतिहासिक योगदान को दर्शाने वाला एक विस्तृत शिलालेख भी प्रदर्शनी में रखा गया, जिसने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
इसके अलावा आईसीएफ स्लीपर कोच, कंटेनर वैगन, टैंक, वुडेन स्लीपर कोच, स्टीम लोकोमोटिव मॉडल तथा सेमी हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस के मॉडल भी प्रदर्शनी में प्रमुख आकर्षण बने रहे, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और उन्होंने रेलवे के ऐतिहासिक से आधुनिक सफर को करीब से महसूस किया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

