पर्यटन स्थल नहीं, अपितु राष्ट्र चरित्र निर्माण का स्थल है प्रताप गौरव केन्द्र — प्रो. बीपी शर्मा
उदयपुर, 27 सितम्बर (हि.स.)। प्रताप गौरव केंद्र की स्थापना का उद्देश्य केवल किसी स्मारक या पर्यटन स्थल का निर्माण करना नहीं है, बल्कि राष्ट्र चरित्र निर्माण और युवा पीढ़ी को भारत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
यह बात वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने रविवार को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर प्रताप गौरव केंद्र 'राष्ट्रीय तीर्थ' और राजस्थान होटलियर क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विशेष कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप, मेवाड़ के वीर सपूतों और वीरांगनाओं के त्याग, बलिदान, साहस और स्वाभिमान की गाथाएं आज भी राष्ट्रप्रेम और आत्मसम्मान की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास के गौरवपूर्ण प्रसंगों का स्मरण नई पीढ़ी में अपने राष्ट्र और संस्कृति के प्रति स्वाभिमान जागृत करने का माध्यम बन सकता है।
प्रताप गौरव केंद्र के पद्मिनी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रताप गौरव केंद्र 'राष्ट्रीय तीर्थ' के निदेशक अनुराग सक्सेना ने कहा कि केंद्र में आधुनिक तकनीक के माध्यम से मेवाड़ और भारतीय इतिहास को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। मैकेनिकल शो, 3डी, लाइट एंड साउंड, विभिन्न गैलरी, भारत माता मंदिर और भारत दर्शन जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यटकों और विद्यार्थियों को देश की सांस्कृतिक विविधता, अखंडता और सनातन परंपरा से परिचित कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रताप गौरव केंद्र युवाओं और विद्यार्थियों के लिए एक 'लिविंग क्लासरूम' की तरह है, जहां इतिहास केवल पढ़ाया नहीं जाता, बल्कि उसे अनुभव करने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम में राजस्थान होटलियर क्लब के प्रतिनिधि रजनीकांत शर्मा ने पर्यटन क्षेत्र के विस्तार, नए आयामों और भविष्य की संभावनाओं पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने उदयपुर की पर्यटन क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता बताई।
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों और आम नागरिकों को उदयपुर के समृद्ध इतिहास, मेवाड़ के शौर्य तथा यहां की कला-संस्कृति से परिचित कराना था। इस अवसर पर प्रताप गौरव केंद्र में आने वाले पर्यटकों को प्रवेश शुल्क में विशेष छूट भी दी गई। ₹200 का प्रवेश टिकट ₹150 में उपलब्ध कराया गया। कार्यक्रम में उदयपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने पर विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में पर्यटकों का राजस्थानी परंपरा के अनुसार तिलक और माला पहनाकर स्वागत किया गया। अतिथियों और आगंतुकों के लिए जलपान एवं अल्पाहार की व्यवस्था भी की गई।
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने उदयपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए प्रताप गौरव केंद्र के योगदान की सराहना की।
हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

