क्रॉस वोटिंग पर सियासत तेज, पूर्व सीएम ने उठाए सवाल

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क्रॉस वोटिंग पर सियासत तेज, पूर्व सीएम ने उठाए सवाल


जयपुर, 22 मार्च (हि.स.)। हाल ही हुए राज्यसभा चुनावों में हरियाणा, ओडिशा और बिहार में कांग्रेस विधायकों द्वारा की गई क्रॉस वोटिंग को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

गहलोत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि जब पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, ऐसे समय में पार्टी के विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करना समझ से परे है। उन्होंने सवाल उठाया कि वोट दिखाने की व्यवस्था होने के बावजूद विधायक इस तरह का कदम कैसे उठा रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने अनुभव साझा करते हुए 2018 से 2023 के बीच राजस्थान में हुए राज्यसभा चुनावों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस दौरान कांग्रेस के 102 विधायक होने के बावजूद पार्टी उम्मीदवारों को 126 वोट मिले थे। गहलोत के अनुसार, अतिरिक्त 24 विधायकों के वोट कांग्रेस पर्यवेक्षक नहीं देख सकते थे, फिर भी उन्होंने बिना किसी लोभ-लालच के पार्टी के पक्ष में मतदान किया। इसे उन्होंने पार्टी नेतृत्व के प्रति विश्वास और गुडविल का परिणाम बताया।

गहलोत ने मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए राज्यसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया में बदलाव की आवश्यकता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई विधायक पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर वोट करता है तो उसकी सदस्यता समाप्त करने का प्रावधान होना चाहिए। उनका कहना है कि केवल वोट दिखाने की वर्तमान व्यवस्था खरीद-फरोख्त जैसी प्रवृत्तियों को रोकने में पर्याप्त साबित नहीं हो रही है।

गहलोत के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में राज्यसभा चुनाव की पारदर्शिता और नियमों को लेकर बहस तेज हो गई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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