करोड़ों फॉलोअर्स वाले पवन साहू की गांव की सियासत में एंट्री
भीलवाड़ा, 27 अक्टूबर (हि.स.)। सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों तक पहुंच रखने वाले इन्फ्लुएंसर पवन साहू अब अपने पैतृक गांव फुलियाखुर्द में विकास की नई पहचान बनाने की बात कह रहे हैं। शाहपुरा तहसील की इस ग्राम पंचायत में सरपंच चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। पवन साहू ने अपनी पत्नी कोमल साहू को सरपंच पद के चुनाव मैदान में उतारने की घोषणा की है। हालांकि, उनके स्वयं चुनाव लड़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
फुलियाखुर्द में सरपंच पद के लिए 29 अक्टूबर को नामांकन और 30 अक्टूबर को मतदान होना है। समय कम है और चुनावी गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में सोशल मीडिया की दुनिया में पहचान बना चुके पवन साहू की सक्रियता ने गांव के चुनाव को चर्चा में ला दिया है। उनकी घोषणा ने पंचायत चुनाव में डिजिटल लोकप्रियता, व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय विकास के मुद्दों की भूमिका पर नई बहस शुरू कर दी है।
फेसबुक पर 40 लाख, इंस्टाग्राम पर 70 लाख और यूट्यूब पर 2.7 करोड़ फॉलोअर्स
पवन साहू की पहचान केवल गांव तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उनके फेसबुक पर करीब 40 लाख, इंस्टाग्राम पर 70 लाख और यूट्यूब पर 2.7 करोड़ फॉलोअर्स बताए जाते हैं। इस डिजिटल पहुंच के कारण उनका नाम गांव के सरपंच चुनाव की चर्चा में खास बन गया है। हालांकि, ये आंकड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं और समय के साथ इनमें बदलाव संभव है।
मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए अपनी पहचान बनाने वाले पवन साहू का अपने पैतृक गांव फुलियाखुर्द से जुड़ाव रहा है। अब वे गांव की समस्याओं और विकास की जरूरतों को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। उनके सामने चुनौती डिजिटल मंच पर बनी पहचान को जमीनी स्तर पर जनसंपर्क और विकास की ठोस पहल से जोड़ने की होगी।
पवन साहू ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर अपनी पहल को ‘मिशन 2026’ नाम दिया है। उनका संदेश है—‘मेरा गांव, मेरी पहचान’। वे गांव की तरक्की, प्रत्येक परिवार के सम्मान और जनहित के कार्यों को अपनी सोच का आधार बता रहे हैं।
उनके अनुसार, सरपंच का पद केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि गांव की समस्याओं को समझने और उनके समाधान की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्वच्छता, बेहतर सड़कें, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा और युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता देने की बात कही है। ग्रामीणों से सुझाव मांगते हुए उन्होंने गांव की जरूरतों को सामने लाने और सामूहिक प्रयासों से विकास की दिशा तय करने की अपील की है।
पवन साहू का कहना है कि बालाजी महाराज की असीम कृपा से उन्हें सोशल मीडिया के क्षेत्र में पहचान मिली है। अब वे अपने गांव के लिए कुछ करना चाहते हैं। उनका कहना है कि चुनाव लड़ना या नहीं लड़ना उनके लिए सबसे बड़ा सवाल नहीं है, बल्कि गांव के विकास में योगदान देना उनका उद्देश्य है।
इन दिनों वे गांव में घूमकर ग्रामीणों से संवाद कर रहे हैं। लोगों की समस्याएं सुनने और उनकी जरूरतों को समझने का प्रयास कर रहे हैं। पवन साहू का दावा है कि ग्रामीणों की ओर से बताई गई समस्याओं के समाधान के लिए वे तत्काल प्रयास भी करते हैं। उनके इस संपर्क अभियान से गांव में चुनाव को लेकर चर्चाएं बढ़ी हैं। हालांकि, उनके प्रयासों का वास्तविक प्रभाव और ग्रामीणों की प्रतिक्रिया चुनाव के दौरान सामने आएगी।
पवन साहू ने पत्नी कोमल साहू को सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ाने की घोषणा की है, लेकिन उनके स्वयं चुनाव लड़ने की संभावना भी चर्चा में है। इस कारण प्रत्याशी को लेकर अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। नामांकन के दौरान ही पता चलेगा कि चुनावी मुकाबले में कौन उतरता है।
फुलियाखुर्द की पंचायत राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां सोशल मीडिया की लोकप्रियता के साथ गांव के बुनियादी मुद्दे भी केंद्र में हैं। मतदाताओं के सामने सड़क, पानी, सफाई, शिक्षा और स्थानीय सुविधाओं जैसे सवाल रहेंगे। केवल ऑनलाइन लोकप्रियता से स्थानीय जनसमर्थन का आकलन नहीं किया जा सकता; गांव में संपर्क, समस्याओं की समझ और विकास की व्यावहारिक योजनाएं भी अहम होंगी।
29 अक्टूबर को नामांकन, 30 अक्टूबर को मतदान
सरपंच पद के लिए 29 अक्टूबर को नामांकन और 30 अक्टूबर को मतदान निर्धारित है। चुनाव की समयसीमा नजदीक होने से आने वाले दिनों में फुलियाखुर्द की चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होगी। पवन साहू की सोशल मीडिया पहुंच उनके अभियान को व्यापक प्रचार दे सकती है, लेकिन मतदाताओं का निर्णय स्थानीय परिस्थितियों और प्रत्याशियों के प्रति उनकी समझ पर निर्भर करेगा।
फिलहाल ‘मेरा गांव, मेरी पहचान’ के संदेश के साथ पवन साहू की सक्रियता ने फुलियाखुर्द के सरपंच चुनाव को चर्चा में ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि वे पत्नी कोमल साहू के साथ चुनावी मोर्चा संभालते हैं या स्वयं प्रत्याशी बनकर मैदान में उतरते हैं। नामांकन के बाद स्पष्ट होने वाली तस्वीर ही गांव की चुनावी रणनीति को लेकर स्थिति साफ करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद

