सोशल मीडिया की लोकप्रियता वोटों में नहीं बदल पाई

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सोशल मीडिया की लोकप्रियता वोटों में नहीं बदल पाई


सोशल मीडिया की लोकप्रियता वोटों में नहीं बदल पाई


भीलवाड़ा, 31 अक्टूबर (हि.स.)।सोशल मीडिया पर लाखों लोगों तक पहुंच और देशभर में पहचान बनाने वाले मोबाइल इन्फ्लुएंसर पवन साहू की चुनावी मुहिम को फुलियाखुर्द ग्राम पंचायत में मतदाताओं का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया। शाहपुरा तहसील की फुलियाखुर्द ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए उनकी पत्नी कोमल साहू चुनाव मैदान में थीं। मतगणना के बाद कोमल साहू को महज 277 मत मिले और उन्हें तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। वहीं, स्थानीय प्रत्याशी भगवतीलाल सोनी ने 1203 मत हासिल कर सरपंच पद पर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कालूराम जाट को 797 मत मिले। इस तरह भगवतीलाल सोनी ने 406 मतों के अंतर से जीत हासिल की।

फुलियाखुर्द का यह चुनाव केवल सरपंच पद की सामान्य चुनावी प्रतिस्पर्धा नहीं था। सोशल मीडिया की लोकप्रियता, डिजिटल प्लेटफॉर्म की ताकत, स्थानीय नेतृत्व और गांव के विकास के मुद्दों के बीच यहां एक अलग तरह की चुनावी बहस देखने को मिली। पवन साहू ने अपनी पत्नी कोमल साहू को प्रत्याशी बनाकर चुनाव प्रचार की कमान संभाली थी। उनके चुनावी अभियान ने न केवल फुलियाखुर्द बल्कि जिले के पंचायत चुनावों में भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

सोशल मीडिया की लोकप्रियता और गांव की चुनावी हकीकत

पवन साहू की पहचान सोशल मीडिया के माध्यम से देशभर में बनी है। उनके समर्थकों और प्रशंसकों की बड़ी संख्या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद है। चुनाव के दौरान भी उनके समर्थन में कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फुलियाखुर्द पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर प्रचार, समर्थकों की सक्रियता और विकास के मुद्दे को लेकर चलाए गए अभियान ने इस चुनाव को खास बना दिया था।

पवन साहू ने चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय प्रत्याशियों के बीच विकास के मुद्दों को प्रमुखता नहीं मिलने का सवाल उठाया था। उनका कहना था कि गांव की राजनीति आपसी खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरपंच का चुनाव गांव की सूरत बदलने, बुनियादी सुविधाएं विकसित करने और सरकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने का माध्यम होना चाहिए।

उन्होंने अपनी पत्नी के समर्थन में प्रचार करते हुए ग्रामीणों के सामने विकास का विजन रखा और गांव में बदलाव की बात कही। उनका दावा था कि चुनाव जीतने का इंतजार किए बिना उन्होंने पंचायत के विकास से जुड़े कुछ काम धरातल पर शुरू कराने की दिशा में भी प्रयास किए थे।

चुनाव परिणाम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और वास्तविक चुनावी समर्थन के बीच कितना अंतर हो सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स और समर्थक होना जरूरी नहीं कि गांव की चुनावी राजनीति में भी उसी अनुपात में वोटों में तब्दील हो जाए।

फुलियाखुर्द में पवन साहू के प्रचार अभियान की चर्चा दूर-दूर तक हुई, लेकिन मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए अलग जनादेश दिया। कोमल साहू को मिले 277 वोट इस बात का संकेत हैं कि सोशल मीडिया पर बनी पहचान अपने आप में चुनावी जीत की गारंटी नहीं होती। हालांकि, इस परिणाम के पीछे मतदाताओं के अलग-अलग स्थानीय समीकरण और चुनावी प्राथमिकताएं भी महत्वपूर्ण रही होंगी।

चुनाव परिणाम आने के बाद पवन साहू ने हार स्वीकार करते हुए जनता के फैसले का सम्मान किया। उन्होंने कहा कि जनता जनार्दन का निर्णय उन्हें स्वीकार है। वे अपने गांव और पंचायत की तस्वीर बदलना चाहते थे। संभव है कि उनकी बात जनता तक उस तरह नहीं पहुंच पाई, जैसी अपेक्षा थी।

उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम चाहे जो रहा हो, गांव के विकास को लेकर उनका संकल्प समाप्त नहीं हुआ है। जिन कार्यों को शुरू कराने की दिशा में उन्होंने प्रयास किए हैं, उन्हें पूरा कराने का प्रयास जारी रखेंगे। चुनाव के दौरान जो लोग उनके साथ खड़े रहे, उनके सुख-दुख में भी वे हमेशा साथ रहेंगे।

चुनाव के दिन भी फुलियाखुर्द में पवन साहू की सक्रियता चर्चा में रही। मतदान के दौरान एक महिला मतदाता के पहुंचने पर उसका वोट पहले ही डाले जाने की बात सामने आई थी। इस पर पवन साहू ने आपत्ति जताई और मतदान केंद्र पर मौजूद पुलिसकर्मियों से उनकी कहासुनी हो गई थी। बाद में शाहपुरा से पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश के बाद मामला शांत हुआ। पवन साहू ने इसे फर्जी मतदान का मामला बताते हुए सवाल उठाए थे।

फुलियाखुर्द का चुनाव परिणाम सोशल मीडिया की लोकप्रियता और जमीनी चुनावी राजनीति के बीच के अंतर को सामने लाया है। पवन साहू के लिए यह चुनाव भले ही जीत में तब्दील नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने गांव की राजनीति में विकास और पंचायत की जवाबदेही को लेकर बहस जरूर खड़ी की। अब देखना यह होगा कि चुनाव के बाद भी वे अपने इस संकल्प को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और गांव के विकास में उनकी भूमिका क्या रहती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद

Livevns.news Desk
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