तीर्थराज पुष्कर सरोवर में पौष मास पूर्णिमा से पूरे माह स्नान प्रारम्भ
हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्कर सरोवर में स्नान ध्यान कर किया पुण्य दान और दर्शन
अजमेर, 3 जनवरी(हि.स.)। अजमेर जिले स्थित तीर्थराज पुष्कर में शनिवार को पवित्र सरोवर में पौष मास की पूर्णिमा का विशेष स्नान शुरू हो गया। हजारों श्रद्धालुओं ने कड़ाके की ठंड के बावजूद पुष्कर सरोवर के जल में स्नान कर भगवान ब्रह्मा मंदिर के दर्शन किए और दान पुण्य किया। यह सिलसिला पूरे माह चलेगा। पौष पूर्णिमा के अवसर पर शाम को जयपुर घाट पर पांच मंचों से पुष्कर सरोवर की दिव्य महा आरती की गई।
दिव्य महा आरती संघ पुष्कर की ओर से प्रत्येक माह पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित की जाने वाली दिव्य महा आरती के क्रम में शनिवार को सायं 5:30 बजे जयपुर घाट पुष्कर पर भव्य आयोजन किया गया। नव वर्ष 2026 की प्रथम दिव्य महा आरती के दृष्टिगत विशेष रूप से पांच मंचों से महा आरती आयोजित की गई।
संघ के संरक्षक पूर्व न्यायाधीश अजय शर्मा ने बताया कि नव वर्ष की प्रथम महा आरती को विशेष स्वरूप देने के उद्देश्य से यह आयोजन पांच मंचों से किया गया है। दिव्य महा आरती पंडित चंद्रशेखर गौड़ तीर्थ पुरोहित के नेतृत्व में उनकी टीम द्वारा संपन्न कराई गई। महा आरती का आचार्यत्व पंडित कैलाशनाथ दाधीच तथा उपाचार्यत्व पंडित रवि शंकर गौड़ का रहा।
दिव्य महा आरती कार्यक्रम में अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित संपूर्ण राष्ट्रीय कार्यकारिणी उपस्थित रही। संत सान्निध्य में यज्ञ सम्राट महामंडलेश्वर प्रखर जी महाराज भी आयोजन में शामिल हुए। इस अवसर पर बागेश्वर धाम हनुमंत कथा के पोस्टर का विमोचन भी किया गया।
पंडित कैलाशनाथ दधीच ने बताया कि पौष मास पूर्णिमा पंचांग एवं ज्योतिष की गणित विज्ञान के आधार से सन 2026 की प्रथम पूर्णिमा माघ मास के पुण्य स्नान से प्रारंभ होगी भले ही यह पूर्णिमा मलमास में है मगर माघ मास को धर्मशास्त्र में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। इस दिन तीर्थ में नदियों में स्नान करने से ब्रह्म सरोवर ब्रह्मा की नगरी में स्नान दान पुण्य हवन पूजन का करोडों गुना फल लिखा है।
माघ मास पूर्णिमा के दिन स्वयं नारायण एवं लक्ष्मी तीर्थ में ब्रह्म सरोवर में निवास करते हैं अतः इस दिन हवन पूजन का विशेष महत्व है। वेद एवं शास्त्र के अनुसार जिनकी जन्मपत्री या कुंडली में चंद्रमा शुभ ग्रह शुभ स्थान पर नहीं है उनको पूर्णिमा के दिन भगवान शंकर की उपासना करनी होती है जिससे चंद्रमा की अशुभ दृष्टि और अशुभ योग निवारण हो जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

