हार्ट अटैक के बाद कार्डियोजेनिक शॉक से जूझ रहे मरीज को इंपेला और माइट्राक्लिप से मिला नया जीवन

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हार्ट अटैक के बाद कार्डियोजेनिक शॉक से जूझ रहे मरीज को इंपेला और माइट्राक्लिप से मिला नया जीवन


जयपुर, 12 अगस्त (हि.स.)। मणिपाल हॉस्पिटल, जयपुर में गंभीर हार्ट अटैक के बाद कार्डियोजेनिक शॉक, बेहद कमजोर हार्ट पंपिंग, किडनी फेल्योर और माइट्रल वाल्व में गंभीर लीकेज से जूझ रहे 50 वर्षीय मरीज का अत्याधुनिक तकनीकों से सफल उपचार किया गया। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने इंपेला हार्ट पंप सपोर्ट के साथ एंजियोप्लास्टी और बाद में बिना ओपन हार्ट सर्जरी के माइट्राक्लिप प्रोसीजर किया।

मरीज रमेश चन्द्र (परिवर्तित नाम) को अचानक हार्ट अटैक आने के बाद नजदीकी अस्पताल ले जाया गया था, जहां हृदय की एक प्रमुख धमनी में स्टेंट डाला गया। इसके बावजूद उनकी हालत बिगड़ती गई। ब्लड प्रेशर कम होने के साथ सांस लेने में परेशानी हुई और हृदय की पंपिंग क्षमता काफी घट गई। किडनी ने भी लगभग काम करना बंद कर दिया। गंभीर हालत में उन्हें मणिपाल हॉस्पिटल जयपुर लाया गया।

कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित गुप्ता और उनकी टीम ने जांच में हृदय की दूसरी प्रमुख धमनी में भी गंभीर ब्लॉकेज पाया। मरीज की नाजुक स्थिति में सामान्य तरीके से एंजियोप्लास्टी करना जोखिमपूर्ण था। ऐसे में इंपेला हार्ट पंप की मदद से हृदय को अस्थायी मैकेनिकल सपोर्ट दिया गया और दूसरी धमनी में सफलतापूर्वक स्टेंट डाला गया। इसके बाद मरीज कार्डियोजेनिक शॉक की गंभीर स्थिति से बाहर आया। हालांकि, किडनी की समस्या के कारण कुछ समय तक नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ी।

हार्ट अटैक के बाद मरीज की माइट्रल वाल्व में लीकेज यानी माइट्रल रिगर्जिटेशन बढ़ती गई। इससे उसे बार-बार सांस फूलने की समस्या होने लगी। मरीज की गंभीर स्थिति और अन्य जटिलताओं को देखते हुए ओपन हार्ट सर्जरी बेहद जोखिमपूर्ण थी।

चिकित्सकों ने इसके लिए माइट्राक्लिप प्रोसीजर का विकल्प चुना। पैर की नस के रास्ते कैथेटर को माइट्रल वाल्व तक पहुंचाकर अत्याधुनिक माइट्राक्लिप तकनीक से वाल्व के लीकेज को कम किया गया। प्रोसीजर के बाद मरीज की सांस फूलने की समस्या में सुधार हुआ और हालत धीरे-धीरे स्थिर होने लगी।

मरीज को करीब 50 दिन तक अस्पताल में उपचार और निगरानी में रखा गया। इसके बाद उसे स्वस्थ अवस्था में घर भेज दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार, एक ही हॉस्पिटलाइजेशन के दौरान इंपेला पंप सपोर्टेड एंजियोप्लास्टी और माइट्राक्लिप जैसे दो अत्याधुनिक इंटरवेंशनल उपचार करना बेहद जटिल प्रक्रिया है और ऐसे मामले भारत में दुर्लभ हैं।

डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि मरीज की स्थिति बेहद गंभीर थी। हार्ट की पंपिंग कम होने के साथ किडनी प्रभावित थी और दूसरी प्रमुख धमनी में ब्लॉकेज था। इंपेला सपोर्ट से एंजियोप्लास्टी के बाद स्थिति में सुधार आया, लेकिन माइट्रल वाल्व लीकेज चुनौती बना रहा। ओपन हार्ट सर्जरी के जोखिम को देखते हुए माइट्राक्लिप उपयुक्त विकल्प साबित हुआ। दोनों उपचारों के सफल समन्वय से मरीज को धीरे-धीरे रिकवरी में मदद मिली।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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