‘और देश बंट गया’ नाटिका में दिखी विभाजन की त्रासदी, राष्ट्र प्रथम की भावना का आह्वान

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‘और देश बंट गया’ नाटिका में दिखी विभाजन की त्रासदी, राष्ट्र प्रथम की भावना का आह्वान


जयपुर, 14 अगस्त (हि.स.)। अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, जयपुर की ओर से भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर पाथेय भवन स्थित श्री नारद सभागार में शुक्रवार काे संगोष्ठी एवं नाट्य प्रस्तुति का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लेखक एवं विचारक होनगासंद्र वेंकटरमय्या शेषाद्रि की प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति ‘और देश बंट गया’ पर आधारित नाटिका का मंचन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता जयपुर प्रांत प्रचारक बाबूलाल रहे।

कार्यक्रम में बाबूलाल ने कहा कि भारत विभाजन की त्रासदी वर्ष 1947 में हुई थी, लेकिन विभाजन की प्रक्रिया आज भी अलग-अलग रूपों में जारी है। उन्होंने कहा कि अखंड भारत की परिकल्पना को समझने के लिए विभाजन के इतिहास और उसके कारणों का अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने विभाजन के दौरान पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं और बच्चों पर हुए अत्याचार तथा हिंदू नरसंहार की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं को इतिहास के व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि विभाजन के लिए तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों और मुस्लिम लीग की भूमिका पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। विभाजन के बाद तत्कालीन नेताओं ने अपनी विवशता व्यक्त की थी, लेकिन विभाजन की त्रासदी का प्रभाव आज भी समाज में दिखाई देता है।

प्रांत प्रचारक ने भारत में हिंदू समाज की घटती जनसंख्या दर पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सनातन समाज की युवा पीढ़ी को अपनी विरासत और जीवन मूल्यों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता और सुरक्षा के लिए प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में राष्ट्र प्रथम की भावना को मजबूत करना होगा। उन्होंने समाज में बढ़ते विभाजनकारी तत्वों से सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत के आसपास और समाज के भीतर होने वाले विभिन्न प्रकार के विभाजनों को समझने की आवश्यकता है। सनातन समाज को अपने जीवन मूल्यों के प्रति दृढ़ रहते हुए राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

कार्यक्रम में दिल्ली के अदिति महाविद्यालय की छात्राओं ने ‘और देश बंट गया’ नाटिका प्रस्तुत की। नाटिका के माध्यम से भारत विभाजन के दौरान हुई त्रासदी, विस्थापन और पीड़ा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति को सभागार में मौजूद साहित्यकारों, शिक्षाविदों और पत्रकारों ने सराहा।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के प्रदेश महामंत्री विष्णु शर्मा हरिहर ने कहा कि परिषद् अपनी स्थापना से ही समय के अनुरूप साहित्य में नए प्रयोगों को प्रोत्साहित करती रही है। उन्होंने लोक साहित्य, युवा साहित्य और बाल साहित्य प्रकोष्ठों के माध्यम से राष्ट्रीय भावबोध से जुड़े साहित्य के लेखन और संरक्षण की जानकारी दी।

परिषद् के प्रदेश संयुक्त महामंत्री डॉ. ओमप्रकाश भार्गव ने बताया कि कार्यक्रम आगामी लोकमंथन समारोह की कड़ी में आयोजित किया गया। इसमें प्रदेशभर से साहित्यकार, लेखक, शिक्षाविद् और पत्रकार शामिल हुए।

कार्यक्रम में प्रदेश संगठन मंत्री डॉ. विपिनचंद्र, मूलचंद आर्य, पाथेय कण के सहायक संपादक श्याम सिंह, प्रो. नंदकिशोर पांडेय, डॉ. इंदुशेखर तत्पुरुष, प्रो. अल्पना कटेजा और डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। स्वागताध्यक्ष राधा गोविंद करोल ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

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