आरटीआई का उद्देश्य सुशासन की कार्यसंस्कृति को सुदृढ़ करना
अजमेर, 19 अगस्त(हि.स.)। राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम विषय पर जागरुकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कुलपति प्रो. आनंद भालेराव की प्रेरणा से आयोजित इस कार्यक्रम में संयुक्त कुलसचिव डॉ. हरि सिंह परिहार ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों तथा कर्मचारियों को सूचना के अधिकार से संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी। कार्यक्रम में कुलसचिव अमरदीप शर्मा भी उपस्थित रहे तथा संचालन उप-कुलसचिव मनीष भोमिया ने किया।
डॉ. परिहार ने सूचना के अधिकार की संवैधानिक एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अधिनियम केवल दस्तावेज प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि नागरिकों की शासन-प्रक्रिया में भागीदारी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम है।
व्याख्यान के दौरान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के विभिन्न प्रावधानों—आवेदन प्रक्रिया, अपवाद श्रेणी की सूचनाएं, तृतीय पक्ष सूचना, निर्धारित समय-सीमा, अपील प्रणाली तथा लोक सूचना अधिकारियों की भूमिका—का व्यावहारिक उदाहरणों सहित विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। डॉ. परिहार ने स्पष्ट किया कि आरटीआई का उद्देश्य अधिकारियों को परेशान करना नहीं, बल्कि पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं सुशासन की कार्यसंस्कृति को सुदृढ़ करना है।
सत्र के दौरान उपस्थित कर्मचारियों ने आरटीआई से संबंधित विभिन्न व्यावहारिक प्रश्न पूछे, जिनका डॉ. परिहार ने विस्तारपूर्वक समाधान प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों के लिए उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताया। कार्यक्रम के समापन पर कुलसचिव अमरदीप शर्मा ने इस पहल को निरंतर सीखने तथा प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

