एनआरएए के प्रतिनिधिमंडल ने किया काजरी का दौरा

WhatsApp Channel Join Now
एनआरएए के प्रतिनिधिमंडल ने किया काजरी का दौरा


जोधपुर, 09 अक्टूबर (हि.स.)। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (एनआरएए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. चन्द्र शेखर कुमार, जल प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ. एके. मिश्रा और पंजाब के पूर्व कृषि आयुक्त डॉ. बीएस सिद्धू ने केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) जोधपुर का दौरा किया।

इस दौरान उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ शुष्क एवं वर्षा आधारित क्षेत्रों में कृषि के सतत विकास, अनुसंधान उपलब्धियों, उभरती चुनौतियों तथा आवश्यक नीतिगत सहयोग पर विचार-विमर्श किया। बैठक की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. एचएस जाट ने की। उन्होंने अतिथियों का स्वागत किया तथा संस्थान के वैज्ञानिकों से उनका परिचय कराया।

बैठक में डॉ. पीसी मोहराना ने संस्थान की प्रमुख अनुसंधान उपलब्धियों एवं विकसित तकनीकों का प्रस्तुतिकरण किया। उन्होंने मरुस्थलीकरण नियंत्रण, जल संरक्षण, खड़ीन, नाड़ी एवं टांका जैसी पारंपरिक और उन्नत जल संग्रहण प्रणालियों, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई, गोंद उत्पादन, सौर ऊर्जा आधारित कृषि उपकरणों तथा विभिन्न आकार के खेतों और आंशिक सिंचित परिस्थितियों के लिए विकसित समन्वित कृषि प्रणाली मॉडलों की जानकारी दी। प्रस्तुतिकरण में कम वर्षा की परिस्थितियों के लिए उपयुक्त जलवायु-सहिष्णु फसलों तथा शुष्क क्षेत्र की बागवानी में विकसित किस्मों का विशेष उल्लेख किया गया। इनमें अनार, बेर, करोंदा, गोंदा, जीरा तथा हीना प्रमुख हैं। चर्चा के दौरान डॉ. एचआर महला ने मोठ, ग्वार, मूंग एवं बाजरा जैसी फसलों को शुष्क क्षेत्र की कृषि और किसानों की आजीविका का आधार बताते हुए वर्षा आधारित कृषि के लिए अधिक नीतिगत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. धीरज सिंह ने शुष्क क्षेत्र की बागवानी एवं कृषि वानिकी की संभावनाओं को रेखांकित किया, जबकि डॉ. मचिवाल ने जल संरक्षण, उपलब्ध जल के विवेकपूर्ण उपयोग तथा उपयुक्त तकनीकों के विस्तार के लिए संस्थागत सहयोग की आवश्यकता बताई।

इको-टूरिज्म पार्क का भ्रमण

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान के इको-टूरिज्म पार्क का भी भ्रमण किया। यहां संरक्षित मरुस्थलीय क्षेत्र की दुर्लभ प्रजातियों तथा मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने शुष्क बागवानी खंड का अवलोकन किया, जहां बेर, अनार, गोंदा एवं खेजड़ी जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियों के जर्मप्लाज्म संरक्षण तथा उन्नत किस्मों के विकास में संस्थान के प्रयासों को प्रदर्शित किया गया। इस दौरे के दौरान जल सुरक्षा, मृदा स्वास्थ्य सुधार, जलवायु-सहिष्णु कृषि, बागवानी विविधीकरण, कृषि वानिकी तथा सतत भूमि प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

Share this story