बीकानेर के पीबीएम ट्रोमा अस्पताल में प्रदेश की पहली ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर लैब का ट्रायल शुरू
बीकानेर, 06 जनवरी (हि.स.)। सरकारी मेडिकल कॉलेज बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से संबद्ध ट्रोमा अस्पताल में प्रदेश की पहली अत्याधुनिक ऑर्थो बायोलॉजिकल रिजनरेटिव केयर (ओबीआरसी) लैब का ट्रायल मंगलवार से शुरू हो गया। इस नई तकनीक से बिना ऑपरेशन और चीर-फाड़ के हड्डी एवं मस्क्यूलोस्केलेटल रोगों का उपचार संभव हो सकेगा।
लैब के ट्रायल के अवसर पर पीबीएम अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया, ट्रोमा अस्पताल प्रभारी एवं वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.एल. खजोटिया, वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर सहित अन्य चिकित्सक उपस्थित रहे। डॉ. घीया ने बताया कि यह रिसर्च लैब जीएफसी कन्सन्ट्रेट पर कार्य करेगी, जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस ग्रेड-1 और 2 सहित विभिन्न हड्डी रोगों में बेहतर परिणाम मिलेंगे। उन्होंने कहा कि इस तकनीक से इलाज निशुल्क किया जाएगा तथा इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं हैं।
ट्रायल के पहले दिन पांच मरीजों का उपचार किया गया। डॉ. खजोटिया ने बताया कि ओबीआरसी तकनीक पीआरपी से अलग और अधिक प्रभावी है। इसके माध्यम से मरीज के स्वयं के रक्त एवं बोन मैरो से प्राप्त ब्लड कंपोनेंट्स को संकेंद्रित कर शरीर में प्राकृतिक हीलिंग और टिशू रिपेयर को बढ़ावा दिया जाता है। अब ट्रोमा अस्पताल में प्रत्येक मंगलवार को इस तकनीक से उपचार किया जाएगा।
वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय कपूर ने बताया कि यह ओपीडी आधारित डे-केयर प्रक्रिया है, जिसमें रोगी लगभग एक घंटे में उपचार लेकर घर जा सकता है। इस तकनीक का उपयोग स्पोर्ट्स इंजरी, घुटनों का दर्द, आर्थराइटिस, टेनिस एल्बो, फ्रोजन शोल्डर, हिप, एंकल, प्लांटर फेशियाइटिस, हड्डियों के डिले या नॉन यूनियन तथा डिस्क प्रोलैप्स जैसी बीमारियों में किया जाएगा।
चिकित्सकों ने बताया कि इस रिसर्च क्लीनिक को क्लिनिकल रिसर्च कमेटी से स्वीकृति प्राप्त है और यहां रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा शोध कार्य भी किए जाएंगे। लैब की स्थापना में नोखा के भामाशाह मघाराम कुलरिया का सहयोग रहा है, जबकि एमपी-एमएलए लैड फंड से भी सहयोग की मांग की गई है। अधिकारियों के अनुसार ओबीआरसी लैब के बाद शीघ्र ही ऑर्थोपेडिक मेडिकल रिसर्च सेंटर की स्थापना भी की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

