सावधान! अनजान को फोन देना बन सकता है मुसीबत
जयपुर, 03 अप्रैल (हि.स.)। अगर आप किसी अनजान व्यक्ति को जरूरी कॉल करने के लिए अपना मोबाइल दे देते हैं, तो यह छोटी सी मदद आपको भारी पड़ सकती है। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को सतर्क करते हुए चेतावनी जारी की है कि इस तरह की लापरवाही साइबर ठगी का कारण बन सकती है।
पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार जारी इस अलर्ट में डीआईजी साइबर क्राइम शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, पार्क और पर्यटन स्थलों पर ठग “जरूरी कॉल” का बहाना बनाकर लोगों से मोबाइल मांगते हैं और कुछ ही सेकंड में ठगी को अंजाम दे देते हैं।
उन्होंने बताया कि सबसे खतरनाक तरीका “कॉल फॉरवर्डिंग स्कैम” है। इसमें ठग आपके मोबाइल से एक कोड डायल कर देते हैं, जिससे आपके फोन पर आने वाले ओटीपी सीधे उनके नंबर पर जाने लगते हैं। इसके बाद वे आपके बैंक खाते, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट तक पहुंच बना सकते हैं।
इसके अलावा कई मामलों में ठग मोबाइल में चुपचाप स्पाइवेयर या की-लॉगर इंस्टॉल कर देते हैं, जिससे आपकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है। पासवर्ड, बैंक डिटेल और निजी जानकारी तक उनकी पहुंच हो जाती है। यहां तक कि वे आपके कॉन्टैक्ट्स का दुरुपयोग कर रिश्तेदारों से इमरजेंसी के नाम पर पैसे भी ठग सकते हैं।
पुलिस ने यह भी चेताया कि यदि आपके मोबाइल का उपयोग किसी गैरकानूनी गतिविधि में किया गया, तो जांच में आपका नंबर सामने आ सकता है और आप अनावश्यक कानूनी परेशानी में फंस सकते हैं।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी की मदद करते समय भी सतर्कता बरतें। मोबाइल अपने हाथ में रखते हुए स्वयं नंबर डायल करें और स्पीकर पर बात करवाएं। किसी भी अनजान व्यक्ति को अनलॉक मोबाइल न दें।
यदि गलती से मोबाइल दे दिया हो तो तुरंत *#21# डायल कर कॉल फॉरवर्डिंग चेक करें और ##002# डायल कर उसे हटाएं। साथ ही सभी पेमेंट ऐप (यूपीआई) पर पिन या बायोमेट्रिक लॉक अनिवार्य रूप से सक्रिय रखें।
राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या संबंधित साइबर हेल्पडेस्क पर शिकायत दर्ज कराएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

