माता के दरबार सजकर तैयार: घट स्थापना के साथ शुरू होंगे नवरात्र

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माता के दरबार सजकर तैयार: घट स्थापना के साथ शुरू होंगे नवरात्र


माता के दरबार सजकर तैयार: घट स्थापना के साथ शुरू होंगे नवरात्र


माता के दरबार सजकर तैयार: घट स्थापना के साथ शुरू होंगे नवरात्र


जयपुर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। शक्ति आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू होगा। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाले नवरात्र में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस बार माता रानी का आगमन हाथी पर होने की मान्यता है, जिसे अच्छी वर्षा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। वहीं, मंगलवार को नवरात्र का समापन होने के कारण माता रानी मुर्गे पर सवार होकर विदा होंगी। नवरात्र को लेकर राजधानी के प्रमुख मंदिरों सहित घरों में तैयारियां पूरी की जा रही हैं। मंदिरों में विशेष शृंगार, घट स्थापना, पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होंगे।

राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि 11 अक्टूबर को नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11:47 से दोपहर 12:34 बजे तक श्रेष्ठ रहेगा। द्विस्वभाव धनु लग्न सुबह 11:28 से दोपहर 1:33 बजे तक रहेगा। लाभ और अमृत चौघड़िया सुबह 9:16 से दोपहर 12:11 बजे तक तथा शुभ चौघड़िया दोपहर 1:38 से 3:06 बजे तक रहेगा। शास्त्रों में घट स्थापना के लिए चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को वर्जित बताया गया है। ऐसे में अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना करना श्रेष्ठ माना जाता है।

राजापार्क स्थित पंचवटी सर्किल के वैष्णो देवी मंदिर में नवरात्र के अवसर पर नौ दिन तक विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। वैष्णो देवी सेवा समिति (पंजीकृत) राजापार्क के अध्यक्ष राज भाटिया और उपाध्यक्ष कमलेश असुदानी ने बताया कि 11 अक्टूबर को अभिजित मुहूर्त में सुबह 11:51 से दोपहर 12:15 बजे तक घट स्थापना की जाएगी। इसके बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे और दर्शन शुरू होंगे।

मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी, आकर्षक फूलों और चुनरी से सजाया जाएगा। नौ दिनों तक माता का विशेष शृंगार होगा और प्रतिदिन सात से नौ बार पोशाक बदली जाएगी। इससे श्रद्धालुओं को माता के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन होंगे। समिति के सचिव राजकुमार भाटिया, कोषाध्यक्ष इंद्रजीत शर्मा और उपसचिव योगेश खुराना ने बताया कि नवरात्र के दौरान प्रतिदिन सुबह-शाम प्रसाद वितरित किया जाएगा। माता को हलवा, चना और पूरी का भोग लगाया जाएगा।

आमेर स्थित शिला माता मंदिर में 11 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे नवरात्र स्थापना होगी। इसके बाद दोपहर एक बजे से श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर में 16 अक्टूबर को छठ का मेला भरेगा, जबकि 18 अक्टूबर को रात 10 बजे निशा पूजन होगा। अष्टमी पर 19 अक्टूबर को शाम 4:30 बजे पूर्णाहुति होगी। इस दिन दोपहर 12:30 से शाम 4 बजे तक मंदिर के पट मंगल रहेंगे।

दुर्गापुरा स्थित प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में 11 अक्टूबर को सुबह सात बजे घट स्थापना होगी। इस अवसर पर माता को नवीन जरी की पोशाक धारण कराई जाएगी। गुलाब, हजारा और मोगरे के पुष्पों से विशेष शृंगार किया जाएगा। मंदिर के महंत महेंद्र भट्टाचार्य ने बताया कि 17 अक्टूबर को सप्तमी के दिन मेला भरेगा, जबकि 19 अक्टूबर की रात हवन होगा।

नवरात्र के नौ दिनों में राजधानी के मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के साथ पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजनों से भक्तिमय माहौल रहेगा। श्रद्धालु माता रानी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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