राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के लिए सभी शिक्षण संस्थाएं मिलकर प्रयास करें : कुम्हार
अजमेर, 18 सितंबर (हि.स.)। विद्या भारती राजस्थान के उपाध्यक्ष भरतराम कुम्हार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों को हासिल करने के लिए आध्यात्मिक एवं समविचारी शिक्षण संस्थाओं को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही मनुष्य में आध्यात्मिकता, नैतिकता और संस्कारों के विकास का प्रमुख माध्यम है।
कुम्हार शुक्रवार को दयानंद महाविद्यालय अजमेर में आयोजित आध्यात्मिक शैक्षिक संस्थान समविचारी समूह की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता भारत की पहचान रही है और सेवा, परोपकार, सत्याचरण, राष्ट्रभक्ति तथा सामाजिक समरसता जैसे मूल्यों से इसे व्यवहार में उतारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश में आज भी ऐसी शिक्षण संस्थाएं हैं जो शिक्षा और संस्कार देने का कार्य सेवाभाव से कर रही हैं। यदि ये संस्थाएं आपसी सहयोग से शिक्षा के इस स्वरूप को व्यापक बनाने पर विचार करें तो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों की प्राप्ति में अधिक प्रभावी योगदान दिया जा सकता है।
कुम्हार ने बताया कि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के माध्यम से देशभर में 13 हजार से अधिक विद्यालय-महाविद्यालय तथा इतने ही अन्य अनौपचारिक शिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने राजस्थान की समविचारी शिक्षण संस्थाओं से शिक्षा के मूल्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए मिलकर चिंतन करने का आह्वान किया।
बैठक में विद्या भारती राजस्थान के संगठन मंत्री गोविंद कुमार, विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत के मंत्री डॉ. सुरेंद्र कुमार अरोड़ा, निरीक्षक नवीन कुमार झा और विद्या भारती शिक्षा संस्थान अजमेर के सचिव संजय शर्मा मौजूद रहे।
बैठक में डीएवी महाविद्यालय अजमेर, डीबीएनसी सीनियर सेकेंडरी स्कूल अजमेर, गायत्री विद्यापीठ पुष्कर, वेदपाठी महाविद्यालय पुष्कर, संस्कृत महाविद्यालय निम्बार्क पीठ, वर्धमान बालिका महाविद्यालय ब्यावर, कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय निम्बाहेड़ा, श्री वर्धमान कन्या महाविद्यालय ब्यावर, श्री कन्या आर्य दयानंद महाविद्यालय ब्यावर और श्री भंवरलाल गोठी पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल ब्यावर के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

