यूसीसी के विरोध में मुस्लिम समाज ने की विधानसभा कूच की कोशिश
जयपुर, 21 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान में प्रस्तावित यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के विरोध में शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोग सड़कों पर उतरे। मोती डूंगरी रोड स्थित मुसाफिर खाने में मुस्लिम समाज की बड़ी धार्मिक सभा आयोजित हुई। जिसमें बड़ी संख्या में महिला-पुरुष शामिल हुए। सभा में वक्ताओं ने यूसीसी को लेकर आपत्तियां जताते हुए राज्य सरकार से इसे लागू नहीं करने की मांग की। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा की ओर कूच करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने एमडी रोड पर समझाइश के बाद उन्हें रोक लिया और राज्यपाल के नाम ज्ञापन लिया।
सभा में सामाजिक, धार्मिक और मानवाधिकार संगठनों के साझा मंच ने प्रस्तावित कानून को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। मंच ने सरकार से यूसीसी के प्रस्ताव पर विस्तृत श्वेतपत्र जारी करने तथा कानून बनाने से पहले संबंधित समुदायों, महिला संगठनों, विधि विशेषज्ञों, धार्मिक विद्वानों और सिविल सोसाइटी से व्यापक परामर्श करने की मांग की।
वक्ताओं ने कहा कि भारत में समान नागरिक संहिता का मुद्दा पिछले सात दशक से संविधान सभा की बहसों से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों, चुनावी घोषणापत्रों और विधानसभाओं तक चर्चा में रहा है। उत्तराखंड में वर्ष 2024 में राज्य स्तर पर यूसीसी लागू किया गया। इसके बाद गुजरात, असम, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित कुछ राज्यों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
राजस्थान सरकार ने राज्य स्तरीय यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं।
साझा मंच ने कहा कि यूसीसी केवल कानूनी सुधार का विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध धर्म, संस्कृति, पहचान, महिला अधिकार, आदिवासी परंपराओं और संघीय ढांचे से भी है। राजस्थान जैसे बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक राज्य में समान कानून के अलग-अलग समुदायों पर पड़ने वाले प्रभावों का गंभीर अध्ययन किया जाना चाहिए।
मंच ने संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला देते हुए कहा कि राज्य को समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है, जबकि अनुच्छेद 25 और 26 नागरिकों तथा धार्मिक समुदायों को धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक मामलों के प्रबंधन का अधिकार देते हैं। वक्ताओं ने कहा कि अनुच्छेद 44 नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है और अनुच्छेद 37 के तहत ये शासन के लिए मार्गदर्शक हैं। इसलिए इनके क्रियान्वयन में मौलिक अधिकारों के प्रभावित होने की स्थिति से बचना जरूरी है।
साझा मंच ने आशंका जताई कि यदि यूसीसी के जरिए विभिन्न समुदायों को उनकी मौजूदा धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से अलग किसी वैधानिक व्यवस्था का पालन करने के लिए बाध्य किया जाता है तो संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19, 21, 25, 26 और 29 के तहत प्राप्त अधिकारों को लेकर गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े हो सकते हैं।
मंच ने कहा कि विभिन्न समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद विविधता देश की बहुलतावादी सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना का हिस्सा है। इसलिए व्यक्तिगत कानूनों में किसी भी बदलाव से पहले संबंधित समुदायों और विशेषज्ञों के साथ व्यापक संवाद होना चाहिए।
सभा में राजस्थान सरकार से यूसीसी लागू करने से पहले इसके संवैधानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श कराने की मांग की गई। मंच ने प्रदेश के सामाजिक, धार्मिक और मानवाधिकार संगठनों से भी इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय का विरोध करना नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र, धार्मिक स्वतंत्रता और देश की बहुलतावादी विरासत की रक्षा करना है। साझा मंच ने राज्य सरकार से राजस्थान में यूसीसी लागू नहीं करने का आह्वान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

