2 मई से शुरू होगा ज्येष्ठ माह, 59 दिन तक भक्ति और सेवा का विशेष संयोग

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2 मई से शुरू होगा ज्येष्ठ माह, 59 दिन तक भक्ति और सेवा का विशेष संयोग


जयपुर, 30 अप्रैल (हि.स.)। हिंदू कैलेंडर का तीसरे महीने ज्येष्ठ की शुरुआत 2 मई से हो रही है, जो 29 जून तक चलेगा। हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व माना जाता है। यह महीना सिर्फ भीषण गर्मी के लिए ही नहीं, बल्कि भक्ति-सेवा के लिए भी जाना जाता है।

पंडित बनवारी लाल शर्मा के अनुसार इस माह में भगवान विष्णु, सूर्य देव और हनुमान जी की उपासना करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती हैं। साथ ही, ज्येष्ठ माह में बड़ा मंगल, वट सावित्री व्रत और निर्जला एकादशी जैसे महत्वपूर्ण पर्व-त्योहार भी आएंगे। इस बार ज्येष्ठ माह और भी खास इसलिए है, क्योंकि अधिक मास के संयोग से यह सामान्य दिनों से लंबा होकर 59 दिनों तक चलेगा। यह दुर्लभ योग भक्ति, साधना और दान-पुण्य के लिए एक विशेष अवसर प्रदान करेगा। इस माह में जगह-जगह प्याऊ लगाई जाएगी। प्रमुख मार्गों पर वाटर कूलर लगाए जाएंगे। श्रद्धालु मंदिरों में भी जल से भरे मटके दान करेंगे।

आठ बड़ा मंगल:ज्येष्ठ माह में आने वाले मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। इस दिन पर हनुमान जी की पूजा विशेष महत्व रखती है, क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ महीने के एक मंगलवार को ही भगवान राम और भगवान हनुमान की पहली भेंट हुई थी। अधिकमास होने के कारण इस बार ज्येष्ठ माह में 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं। पहला बड़ा मंगल 5 मई को पड़ रहा है। वहीं आखिरी यानी आठवें बड़े मंगल का व्रत 23 जून को किया जाएगा।

वट सावित्री व्रत और शनि जयंती: ज्येष्ठ माह में आने वाली अमावस्या तिथि पर सुहागिन महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत किया जाता है, जो इस बार 16 मई को किया जाएगा। माना जाता है कि सुहागिन महिलाओं द्वारा इस व्रत करने से उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही इस दिन पर शनि अमावस्या भी पड़ रही है, जो हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है।

गंगा दशहरा: ज्येष्ठ माह में मनाए जाने वाला गंगा दशहरा एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो इस बार 25 मई को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल की दशमी तिथि पर ही मां गंगा देवलोक से धरती पर अवतरित हुई थीं। इस तिथि को गंगा स्नान, दान, जप-तप, उपासना और उपवास के लिए उत्तम माना गया है।

निर्जला एकादशी व्रत:ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। इसे भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस बार यह व्रत गुरुवार, 25 जून को किया जाएगा। साल की सभी 24 एकादशियों में से निर्जला एकादशी सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण मानी गई है, क्योंकि इस दिन निर्जला व्रत करने से श्रद्धालु को साल की सभी चौबीस एकादशियों के उपवास रखने के समान फल मिलता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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