भीलवाड़ा में मानसून की दमदार वापसी, बदनोर में नौ, आसींद में छह इंच बारिश

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भीलवाड़ा में मानसून की दमदार वापसी, बदनोर में नौ, आसींद में छह इंच बारिश


भीलवाड़ा में मानसून की दमदार वापसी, बदनोर में नौ, आसींद में छह इंच बारिश


भीलवाड़ा में मानसून की दमदार वापसी, बदनोर में नौ, आसींद में छह इंच बारिश


भीलवाड़ा में मानसून की दमदार वापसी, बदनोर में नौ, आसींद में छह इंच बारिश


भीलवाड़ा में मानसून की दमदार वापसी, बदनोर में नौ, आसींद में छह इंच बारिश


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भीलवाड़ा में मानसून की दमदार वापसी, बदनोर में नौ, आसींद में छह इंच बारिश


भीलवाड़ा में मानसून की दमदार वापसी, बदनोर में नौ, आसींद में छह इंच बारिश


भीलवाड़ा, 23 जुलाई (हि.स.)।भीलवाड़ा जिले में 18 दिन की लंबी खामोशी के बाद मानसून ने बुधवार को जोरदार वापसी की। एक ही दिन में बदनोर में करीब 9 इंच और आसींद में 6 इंच बारिश दर्ज की गई। तेज बारिश से जहां आसींद कस्बा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हो गया, वहीं प्रकृति ने ऐसा दुर्लभ नजारा भी दिखाया, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से उमड़ पड़े। लगातार हुई बारिश के बाद आस पहाड़ का प्राकृतिक झरना करीब 35 साल बाद पूरे वेग से बह निकला।

बारिश का असर जिले के कई हिस्सों में देखने को मिला। नेखाड़ी नदी उफान पर आ गई, पुल जलमग्न हो गए, बाजारों में तीन से चार फीट तक पानी भर गया और कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। हालांकि किसानों के लिए यह बारिश राहत लेकर आई है। खरीफ फसलों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद जगी है।

बदनोर क्षेत्र के आस पहाड़ पर स्थित धूणी आश्रम के महंत महेंद्र पुरी महाराज ने बताया कि वे पिछले दस वर्षों से आश्रम में रह रहे हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने आस पहाड़ के झरने को इतनी तेज धार के साथ बहते देखा है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि करीब 35 वर्ष पहले ऐसी बारिश हुई थी, जब यह झरना पूरे वेग से बहा था। उसके बाद पहली बार यह दृश्य देखने को मिला है।

झरने से गिरते पानी की गर्जना दूर-दूर तक सुनाई दे रही है। पहाड़ी से नीचे उतरती सफेद जलधारा ने पूरे क्षेत्र को प्राकृतिक पर्यटन स्थल का रूप दे दिया है। सोशल मीडिया पर भी झरने के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

आस पहाड़ पर झरना बहने की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों के साथ शाहपुरा, भीलवाड़ा, बदनोर और आसींद से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे। युवाओं ने झरने के साथ सेल्फी और वीडियो बनाए, जबकि परिवारों ने प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई वर्षों बाद ऐसा मनमोहक दृश्य देखने को मिला है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि झरने पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। फिसलन और तेज बहाव के कारण हादसे की आशंका बनी हुई है।

लगातार बारिश से आसींद क्षेत्र से गुजरने वाली नेखाड़ी नदी उफान पर आ गई। बाजुंदा रोड पर नदी का पुल करीब एक फीट पानी में डूब गया। पुल पर तेज बहाव होने के कारण प्रशासन ने आवाजाही बंद करवा दी। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लोगों को वैकल्पिक मार्गों से सफर करना पड़ा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि नदी-नालों और पुल-पुलियों पर पानी होने की स्थिति में जोखिम न उठाएं तथा सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

मूसलाधार बारिश ने आसींद कस्बे की जल निकासी व्यवस्था की भी पोल खोल दी। मुख्य बाजार में तीन से चार फीट तक पानी भर गया। कई दुकानों और मकानों में पानी घुस गया, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। बारिश का पानी घंटों तक नहीं निकला। दुकानदारों ने बताया कि नालियों की समुचित सफाई और निकासी व्यवस्था नहीं होने से हर बारिश में यही स्थिति बन जाती है। बाजार में दिनभर व्यापार प्रभावित रहा और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।

बारिश के बीच आसींद-बोजुंदा मार्ग पर हाथीभाटा और केसरपुर के बीच बड़ा हादसा टल गया। एक निजी स्कूल की बस सड़क पर बने गहरे गड्ढे में फंस गई। बस में 35 से 40 छात्र-छात्राएं सवार थे। बस के फंसते ही बच्चों में घबराहट फैल गई। सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और ट्रैक्टर की मदद से बस को सुरक्षित बाहर निकाला। समय रहते राहत मिलने से सभी बच्चे सुरक्षित बच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यदि बस थोड़ी और धंस जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था।

ग्रामीणों का कहना है कि हाथीभाटा-केसरपुर मार्ग की स्थिति हर बारिश में खराब हो जाती है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन जाते हैं और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। करीब दो वर्ष पहले भी इसी स्थान पर हादसा हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे।

लगातार 18 दिनों तक बारिश नहीं होने से किसान चिंतित थे। कई स्थानों पर खरीफ फसलें सूखने लगी थीं। बुधवार को हुई तेज बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी पहुंची है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक हल्की बारिश का क्रम बना रहा तो सोयाबीन, मक्का, उड़द और अन्य खरीफ फसलों को बड़ा लाभ मिलेगा। बारिश के बाद खेतों में किसानों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। कई किसानों ने इसे मौसम का सबसे बड़ा राहतभरा दौर बताया।

बारिश के बाद प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों, पुल-पुलियों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें। बच्चों को पानी वाले क्षेत्रों में नहीं जाने दें और अनावश्यक रूप से झरनों तथा तेज बहाव वाले स्थानों पर भीड़ न लगाएं। जिले में मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे तक कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन ने सतर्क रहने और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद

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