राजस्थान में फिर सक्रिय हो सकता है मानसून, 15 जिलों में यलो अलर्ट जारी

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राजस्थान में फिर सक्रिय हो सकता है मानसून, 15 जिलों में यलो अलर्ट जारी


राजस्थान में फिर सक्रिय हो सकता है मानसून, 15 जिलों में यलो अलर्ट जारी


जयपुर, 19 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान में मानसून की रफ्तार एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार पहले पूर्वी राजस्थान और उसके बाद पश्चिमी राजस्थान में बारिश की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। मौसम केंद्र जयपुर ने रविवार को प्रदेश के 15 जिलों में आंधी और बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।

पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश में सबसे अधिक 32 मिलीमीटर बारिश दौसा जिले के बसवा क्षेत्र में हुई। इसके अलावा अलवर, धौलपुर, बूंदी और कोटा के कुछ इलाकों में भी हल्की बारिश हुई। हालांकि प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान अब तक सामान्य से करीब 25 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जिससे किसानों और आमजन की निगाहें आगामी बारिश पर टिकी हुई हैं।

मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी भारत के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र कमजोर होकर अब चक्रवाती परिसंचरण तंत्र में बदल गया है।

वहीं मानसून ट्रफ लाइन अमृतसर, करनाल और रांची से होकर गुजर रही है। इसके प्रभाव से पूर्वी राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में अगले दो से तीन दिन तक कमजोर मानसूनी परिस्थितियां बनी रह सकती हैं, लेकिन 20 और 21 जुलाई से कोटा, भरतपुर, जयपुर और अजमेर संभाग के कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने पश्चिमी राजस्थान के लिए भी राहतभरी खबर दी है। विभाग के अनुसार 22 से 28 जुलाई के बीच जोधपुर और बीकानेर संभाग के कई इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की प्रबल संभावना है। फिलहाल पश्चिमी राजस्थान में केवल श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के कुछ हिस्सों में ही हल्की बारिश हुई है।

उधर, प्रदेश में गर्मी का असर भी बना हुआ है। श्रीगंगानगर लगातार सबसे गर्म जिला बना हुआ है। पिछले 10 दिनों में से 9 दिन श्रीगंगानगर प्रदेश का सबसे गर्म स्थान रहा। शनिवार को यहां अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 31.3 डिग्री सेल्सियस मापा गया।

वहीं बीकानेर में अधिकतम तापमान 40.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी सप्ताह में मानसून की गतिविधियों में सुधार होने से प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जिससे तापमान में गिरावट आने और खरीफ फसलों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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