मोबाइल की लत बनती मानसिक महामारी : डॉ. लवेश सैनी
जयपुर, 20 फ़रवरी (हि.स.)। मोबाइल आज लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग मानसिक और सामाजिक जीवन पर गंभीर असर डाल रहा है। मनोचिकित्सक डॉ. लवेश सैनी ने सलाह दी है कि अनियंत्रित मोबाइल उपयोग धीरे-धीरे मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है।
डॉ. सैनी के अनुसार युवाओं में देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत तेजी से बढ़ रही है। मोबाइल से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद के हार्मोन मेलाटोनिन को प्रभावित करती है, जिससे नींद की कमी, चिड़चिड़ापन, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया पर दूसरों की जीवनशैली से लगातार तुलना करने से आत्मविश्वास पर भी असर पड़ रहा है।
बच्चों और छात्रों में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग पढ़ाई और एकाग्रता को प्रभावित कर रहा है। लगातार स्क्रीन देखने से ध्यान भटकता है और पढ़ाई में रुचि कम होती जा रही है। कई मामलों में फोन छीनने पर बच्चों में गुस्सा और आक्रामक व्यवहार भी देखने को मिलता है। आउटडोर गतिविधियां घटने से मोटापा और आंखों से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि युवाओं और वयस्कों में ‘फोमो’ यानी कुछ छूट जाने का डर लोगों को बार-बार मोबाइल चेक करने के लिए मजबूर करता है। इसका असर पारिवारिक रिश्तों पर भी पड़ रहा है और संवाद कम होता जा रहा है।
डॉ. सैनी का कहना है कि मोबाइल का उपयोग सीमित करना, घर में कुछ स्थानों को गैजेट-फ्री रखना, सप्ताह में एक दिन डिजिटल डिटॉक्स अपनाना और परिवार के साथ समय बिताना जरूरी है। यदि मोबाइल के कारण नींद, व्यवहार या कामकाज प्रभावित होने लगे तो इसे नजरअंदाज न करें और विशेषज्ञ से सलाह लें।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

