परकोटे के नीचे मेट्रो की सुरंग शुरू: गलता गेट से ट्रांसपोर्ट नगर तक जुड़ेगा जयपुर
जयपुर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। गुलाबी नगरी के ऐतिहासिक परकोटे के नीचे मेट्रो विस्तार की दिशा में शनिवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गलता गेट पर टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का शुभारंभ कर जयपुर मेट्रो फेज-1सी के भूमिगत सुरंग निर्माण की शुरुआत की। करीब 1511 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के पूरा होने पर बड़ी चौपड़ से आगे गलता गेट होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो कनेक्टिविटी मिलेगी। लगभग 3.80 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में करीब तीन किलोमीटर भूमिगत ट्रैक और 800 मीटर एलिवेटेड रैंप का निर्माण होगा। परियोजना के तहत दो नए स्टेशन बनाए जाएंगे।
परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती ऐतिहासिक परकोटे के नीचे सुरंग बनाना है। इस क्षेत्र में घनी आबादी, पुराने भवन, ऐतिहासिक संरचनाएं, संकरी सड़कें और व्यस्त बाजार हैं। ऐसे में सड़क खोदकर निर्माण करने से यातायात, व्यापारिक गतिविधियों और आसपास की इमारतों पर असर पड़ सकता था। इसे देखते हुए टीबीएम तकनीक से भूमिगत सुरंग बनाई जा रही है। यह मशीन जमीन के भीतर खुदाई करने के साथ सुरंग की दीवारों पर कंक्रीट सेगमेंट भी लगाएगी। इससे ऊपर की सड़कों को खोदने की आवश्यकता नहीं होगी और बाजारों की गतिविधियां जारी रखी जा सकेंगी।
जयपुर मेट्रो के सीएमडी वैभव गालरिया ने बताया कि फेज-1सी में करीब 2.25 किलोमीटर लंबी दो समानांतर भूमिगत सुरंगें बनाई जाएंगी। आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षित निकासी के लिए इनके बीच सात क्रॉस पैसेज भी बनाए जाएंगे। गलता गेट स्टेशन भूमिगत और ट्रांसपोर्ट नगर स्टेशन एलिवेटेड होगा। गलता गेट स्टेशन करीब 200 मीटर लंबा और 24 मीटर चौड़ा होगा। इसका ट्रैक स्तर जमीन से लगभग 15 मीटर नीचे रहेगा।
निर्माण के दौरान आसपास की इमारतों और धरोहर संरचनाओं की उपकरणों से लगातार निगरानी की जाएगी। गालरिया के अनुसार, मेट्रो ट्रैक की गहराई अधिक होने के कारण कम गहराई पर स्थित उपयोगिता लाइनों से जुड़ी बड़ी समस्या की आशंका नहीं है। निर्माण में धरोहर संरचनाओं को प्रभावित नहीं होने देने का प्रयास किया जाएगा।
गालरिया ने बताया कि गलता गेट पर टीबीएम की शुरुआत के बाद इसे जून-जुलाई 2027 तक बड़ी चौपड़ पर निकालने का लक्ष्य है। इसके बाद सुरंग को मौजूदा फेज-1बी से जोड़ा जाएगा। परियोजना के तहत ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो संचालन मार्च-अप्रैल 2028 तक शुरू करने का प्रयास है, जबकि आधिकारिक पूर्णता की समय-सीमा सितंबर 2028 निर्धारित है।
फेज-1सी के भूमिगत हिस्से के सिविल कार्य के लिए 4 सितंबर 2023 और एलिवेटेड हिस्से के सिविल एवं विद्युत कार्य के लिए 5 दिसंबर 2023 को कार्यादेश की स्वीकृति जारी की गई थी। बाद में राज्य सरकार ने कॉरिडोर की उपयोगिता और संभावित यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए दोबारा सर्वे कराया। तकनीकी परीक्षण और आर्थिक लाभ के विश्लेषण के बाद प्रस्तावित रामगंज चौपड़ स्टेशन के स्थान पर गलता गेट स्टेशन बनाने का निर्णय लिया गया। संशोधित योजना के तहत जून 2025 में काम फिर शुरू हुआ। आगे खोले के हनुमानजी, आमेर और जलमहल जैसे प्रमुख स्थलों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाएं भी रखी गई हैं।
जयपुर मेट्रो के पश्चिमी हिस्से में फेज-1डी के तहत मानसरोवर से अजमेर रोड चौराहे तक करीब 1.35 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड लाइन और एक स्टेशन बनाया जा रहा है। इस हिस्से में 53 मीटर का बो-स्ट्रिंग गर्डर भी शामिल है। इसका काम जून 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। गालरिया के अनुसार, फेज-1डी का काम अपेक्षाकृत आगे है और इसे अगले साल जून तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। दोनों परियोजनाएं पूरी होने पर पश्चिम में अजमेर रोड चौराहे से पूर्व में ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो का पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर जुड़ जाएगा।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने परियोजना की शुरुआत को जयपुर मेट्रो विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का जयपुर मेट्रो ड्रीम प्रोजेक्ट है और फेज-1सी का काम शुरू होना बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को निर्धारित मानकों और समय-सीमा के अनुसार काम करने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हाल ही में करीब 13,500 करोड़ रुपए की लागत वाली फेज-2 परियोजना की शुरुआत कर चुके हैं। इसकी प्रस्तावित लंबाई लगभग 42 किलोमीटर है। सरकार इसके लिए बजट और संसाधनों की व्यवस्था को लेकर गंभीर है।
गालरिया के अनुसार, फेज-2 में प्रहलादपुरा से पिंजरापोल तक के हिस्से का कार्यादेश जारी हो चुका है। निर्माण के तीन पैकेजों पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है। हवाई अड्डे के भूमिगत हिस्से के लिए निविदाएं प्राप्त हो चुकी हैं और अक्टूबर में कार्यादेश जारी करने का प्रयास है। हवाई अड्डे से कलेक्ट्रेट और कलेक्ट्रेट से छोटी चौपड़ तक के दो चरणों की निविदाएं 15 अक्टूबर को प्राप्त करने का कार्यक्रम है। इन दोनों हिस्सों के लिए नवंबर में कार्यादेश जारी करने का प्रयास किया जा रहा है। फेज-2 के लिए फिलहाल 36 स्टेशन मंजूर हैं, जबकि 37वें स्टेशन पर विचार किया जा रहा है।
जयपुर मेट्रो नेटवर्क को मौजूदा कॉरिडोर से आगे बढ़ाने की योजना भी तैयार की जा रही है। वैशाली नगर, जगतपुरा और अजमेर रोड जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को मेट्रो से जोड़ने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करवाई जा रही है। इन प्रस्तावित कॉरिडोरों के विकास से शहर में एकीकृत मेट्रो नेटवर्क बनाने और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्य सचिव ने निर्माण एजेंसियों को श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रखने, यातायात प्रबंधन और धूल नियंत्रण सुनिश्चित करने तथा निर्माण क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए। उन्होंने धरोहर संरचनाओं की निगरानी रिपोर्ट की नियमित समीक्षा करने और काम समय-सीमा में पूरा करने को कहा। साथ ही निर्माण क्षेत्र के निवासियों और व्यापारियों से सहयोग की अपील की। परकोटे में सुरंग निर्माण के दौरान पुराने भवनों की स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। परियोजना की सफलता के लिए मेट्रो विस्तार के साथ धरोहर संरक्षण, बाजारों की सामान्य गतिविधियों और सुरक्षित निर्माण के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

