मेडिकल कॉलेजों में 1267 नियमित पद समाप्त करने पर चिकित्सा कर्मियों में रोष

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मेडिकल कॉलेजों में 1267 नियमित पद समाप्त करने पर चिकित्सा कर्मियों में रोष


जयपुर, 24 मार्च (हि.स.)। राज्य के सात मेडिकल कॉलेजों में वर्ष 2018 में सृजित 1267 नियमित पदों को समाप्त किए जाने के निर्णय के विरोध में चिकित्सा कर्मियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने इस निर्णय का विरोध जताते हुए मुख्यमंत्री एवं चिकित्सा मंत्री से इन पदों को पुनः सृजित करने की मांग की है।

महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने बताया कि वर्ष 2018 में सीकर, भरतपुर, भीलवाड़ा, पाली, बाड़मेर, चूरू और डूंगरपुर मेडिकल कॉलेजों में कुल 1267 पद सृजित किए गए थे। इनमें 746 नर्सेज, 222 लैब टेक्नीशियन, 240 नर्सिंग ट्यूटर, 14 फिजियोथैरेपिस्ट, 7 ऑडियोमेट्रिस्ट, 13 बायोमेडिकल इंजीनियर, 18 स्पीच थेरेपिस्ट, 18 मेडिकल सोशल वर्कर सहित अन्य विशेषज्ञ एवं अधिकारी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इन पदों पर कार्यरत नियमित कर्मचारी जवाबदेही के साथ गुणवत्तापूर्ण रोगी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में इन पदों को समाप्त कर संविदा कर्मियों की नियुक्ति करने से चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पतालों का संचालन प्रभावित होगा। साथ ही वर्तमान कर्मचारियों के पदस्थापन से जुड़ी समस्याएं भी उत्पन्न होंगी।

महासंघ ने यह भी आरोप लगाया कि संविदा भर्ती के माध्यम से योग्य बेरोजगार चिकित्सा कर्मियों का आर्थिक और सामाजिक शोषण हो रहा है। लैब टेक्नीशियन संघ के प्रदेशाध्यक्ष जितेंद्र सिंह और नर्सेज संघ के अध्यक्ष भुदेव धाकड़ ने निर्णय पर आक्रोश जताते हुए कहा कि कार्यरत कर्मचारियों को हटाकर पुनः भर्ती करना युवाओं के साथ आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण है। वहीं रेडियोग्राफर संघ के प्रदेशाध्यक्ष वकी अहमद फारूकी ने निर्णय को वापस लेकर पदों को यथावत रखने की मांग की। ईसीजी संघ के प्रदेशाध्यक्ष संजय दहिया ने कहा कि यदि पदों को समाप्त कर पुनः सृजित किया जा रहा है, तो यह व्यवस्था में गंभीर खामियों को दर्शाता है।

राज्य के विभिन्न जिलों में चिकित्सा कर्मियों द्वारा इस निर्णय का विरोध किया जा रहा है। महासंघ ने मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर शीघ्र सकारात्मक हस्तक्षेप करते हुए नियमित पदों को पुनः सृजित करने की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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