'मालव राज' की निम्बाहेड़ा में नहीं हो रही खरीद, नए किस्म के गेहूं को लेकर किसान परेशान

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'मालव राज' की निम्बाहेड़ा में नहीं हो रही खरीद, नए किस्म के गेहूं को लेकर किसान परेशान


चित्तौड़गढ़, 30 अप्रैल (हि.स.)। जहां एक ओर सरकार किसानों को राहत देने के लिए समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद कर रही है। गेहूं की खरीद के लिए सरकार ने नियम बनाए है लेकिन निम्बाहेड़ा (मालवा) क्षेत्र में बड़ी मात्रा में उगाए जाने वाले मालव राज किस्म के गेहूं की खरीद नहीं होने से किसान निराश है। इस संबंध में किसानों ने बताया कि मालव राज किस्म के गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद बंद कर दिए जाने के कारण किसान कम दाम पर बाजार में बेचने को मजबूर है। किसान कृषि मंडी भी जाते हैं लेकिन अधिकारी फिलहाल मालव राज गेहूं की खरीद के लिए मना कर रहे हैं।

निंबाहेड़ा तहसील के भावलिया निवासी यशवंत मेहता ने बताया कि इस किस्म के गेहूं की खरीद निम्बाहेड़ा के अतिरिक्त दूसरे क्षेत्रों में समर्थम मूल्य पर की जा रही है। लेकिन निम्बाहेड़ा में बहुतायात में इस किस्म के गेहूं की पैदावार होती है और वहां खरीद नहीं होने से किसान अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को गुहार लगा रहे है। इससे उनकी उपज का समर्थन मूल्य पर दाम मिल सके। लेकिन अभी तक इस किस्म के गेहूं की खरीद शुरू नहीं की गई है। इससे किसानों को कम कीमत पर गेहूं बाजार में बेचना पड़ रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार से मांग है कि मालव राज किस्म के गेहूं की खरीद शुरू करवाए

मालव राज गेहूं की किस्म वर्तमान समय में ज्यादा प्रचलन में आ गई है। यशवंत मेहता ने बताया कि दूसरी किस्माें के मुकाबले मालव राज गेहूं में बीज 70 फीसदी ही लगता है और गेहूं का दाना बाली से नहीं गिरता है। उन्होंने बताया कि इस किस्म की फसल हवा चलने पर आड़ी पड़ने की संभावना कम होती है और इसका भूसा जानवर बड़े चाव से खाते है। इस किस्म पर शीतलहर का प्रकोप भी कम होता है और महीने भर बड़ी होने के बाद नील गाय भी इस किस्म के गेहूं को नहीं खाती है। बताया जाता है कि इस किस्म का गेहूं दलिया बनाने में ज्यादा उपयोग में आते है।

इधर, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के लिए गेहूं खरीद करने वाली कंपनी फास्टेस्ट कृषि एपपीओ के अधिकारी अभिषेक विश्नोई ने बताया कि उनकी कम्पनी एफसीआई के लिए गेहूं की खरीद कर रही है। उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार 15 प्रतिशत से ज्यादा टूट वाला गेहूं नहीं लिया जा रहा है। वहीं मालव राज किस्म में दाने छोटे-बड़े है। इसके लिए मालव राज किस्म की एक खेप एफसीआई गोदाम भेजी गई है। यदि वहां से स्वीकृति आती है तो दो दिन बाद मालव राज किस्म के गेहूं की खरीद शुरु कर दी जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / अखिल

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