लक्ष्मण की मूर्च्छा पर प्रभु श्रीराम के विलाप के साथ आंसुओं से भीगा पंडाल

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लक्ष्मण की मूर्च्छा पर प्रभु श्रीराम के विलाप के साथ आंसुओं से भीगा पंडाल


लक्ष्मण की मूर्च्छा पर प्रभु श्रीराम के विलाप के साथ आंसुओं से भीगा पंडाल


उदयपुर, 17 अक्टूबर (हि. स.)। भक्ति और शक्ति की पावन नगरी में शनिवार की रात निम्बार्क महाविद्यालय के रामलीला प्रांगण में श्रद्धा की ऐतिहासिक धार बह चली। लक्ष्मण की मूर्च्छा पर प्रभु श्रीराम के विलाप के साथ समूचा पांडाल आंसुओं से भीग गया। अवसर था लक्ष्मण को शक्तिबाण लगने का। कलाकारों ने इस प्रसंग में भावनाओं के ऐसे प्राण फूंके कि लगा मानो त्रेतायुग उदयपुर की धरा पर उतर आया हो।

श्रीराम लीला समिति के तत्वावधान में चल रही इस ऐतिहासिक रामलीला का नौवां दिन महज़ एक मंचन नहीं, बल्कि भावनाओं का ऐसा ज्वार रहा जिसमें पूरा शहर गोता लगाता नजर आया। मंच पर जब 'लक्ष्मण शक्ति' का मर्मस्पर्शी प्रसंग उतरा, तो दर्शक दीर्घा में बैठी सांसें मानों थम सी गईं। युद्ध के रणक्षेत्र में मेघनाद का शक्ति बाण लगते ही जब लक्ष्मण अचेत गिरे, तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के भीतर का वह टूटता हुआ मानवी रूप—भाई के प्रति वह आर्तनाद और विलाप देख हर दर्शक का कलेजा कांप उठा।

गहरी व्यथा की स्थिति में जब वैद्य सुषेन के बताए अनुसार बजरंगबली हनुमान संजीवनी बूटी लेकर पहुंचे और संजीवनी के प्रभाव से जैसे ही भ्राता लक्ष्मण की मूर्च्छा दूर हुई तब गोस्वामी तुलसीदास रचित चौपाई 'प्रभु प्रताप तेहि अवसर भयउ बहुरि सुख पाइ, उठि बैठें लछिमन हरषि चले अनुज पहि चाइ' का भाव चरितार्थ हो उठा। भाई के प्रति अनन्य प्रेम के साथ संकट के समय दैवीय कृपा और हनुमानजी के पराक्रम को दर्शाने वाले इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।

शनिवार को रावण के दरबार में रावण के अहंकार को ललकारते अंगद के अडिग पांव और अंगद-रावण संवाद ने भी श्रद्धालुओं को रोमांचित कर दिया। गहरे भावों से भरे संवादों पर जय—जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे। इससे पूर्व श्रीराम सेना प्रस्थान, विभीषण शरणागति और सेतुबंध रामेश्वरम के दृश्यों ने भी श्रद्धालुओं को बांधे रखा।

समिति के महासचिव भंवरलाल शर्मा ने बताया कि नाथद्वारा मंदिर मंडल के अधिकारी सुधाकर शास्त्री, उद्योगपति धीरेन्द्र सच्चान, सुनील भाई जैन, कला महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. नीरज शर्मा, रेडक्रॉस सोसायटी के सचिव गजेन्द्र भंसाली, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश श्रीमाली, दीपक सुखाड़िया, वात्सल्य सेवा समिति के अध्यक्ष प्रकाश अग्रवाल, उदयपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र जैन, पूर्व अध्यक्ष जयकृष्ण दवे, लोकतंत्र सेनानी श्यामसुंदर लोहार, जिला क्रिकेट संघ के यशवंत पालीवाल, पार्षद निर्मला पालीवाल, समाजसेवी डॉ. भंवर हीरावत, भगवती लाल सोनी, वैद्य पुष्करलाल शर्मा, एम. एल. गोयल, परसराम पालीवाल (इंदौर), जिला सांख्यिकी अधिकारी पुनीत शर्मा, श्रीनाथजी मंदिर के भण्डारी रामचंद्र सनाढ्य सहित विभिन्न गणमान्य अतिथियों का सम्मान किया गया। अतिथियों का सम्मान अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी, डॉ. विजय विप्लवी, समन्वयक अशोक बाबेल, हरीश मारवाड़ा, प्रवक्ता कौशल मूंदड़ा, चेतन माली, राकेश पालीवाल, चैनशंकर दशोरा, धरणीधर तिवारी, जगन्नाथ शर्मा, निर्मल चौबीसा, दीपक डांगी, एडवोकेट दिनेश गुप्ता, गोपाल कनेरिया, जगदीश मेनारिया, प्रभाष सुखवाल, रोहित चौबीसा आदि कार्यकर्ताओं ने किया।

इस अवसर पर अतिथि कला महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. नीरज शर्मा ने कहा कि शास्त्रों में यतो धर्मस्ततो जय: कहा गया है। इसका अर्थ है कि जहां धर्म है वहां विजय है और इस धर्म जानने का सबसे सरल मार्ग राम कथा या रामलीला है। प्रो. शर्मा ने कहा कि इसीलिये शास्त्रों में 'रामो विग्रहवान धर्मः' कहा गया है। राम अपने आप में धर्म हैं।

समिति के अध्यक्ष धर्मनारायण जोशी ने बताया कि शनिवार सुबह वृंदावन के पुष्टिमार्गीय श्रीकृष्ण लीला संस्थान के 40 कलाकारों की मण्डली ने समिति सदस्यों के साथ श्रीनाथजी की हवेली पहुंचकर प्रभु श्रीनाथजी के राजभोग की झांकी के दर्शन किए। इस दौरान मंदिर के भण्डारी रामचन्द्र सनाढ्य, समाजसेवी कन्नू भाई पारीक, राजेश भाई मेहता व अन्य अतिथियों ने मण्डली के कलाकारों का उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया।

रामलीला संयोजक डॉ. विजय प्रकाश विप्लवी ने बताया कि नौ दिनों की इस तपस्या और भक्ति के बाद, अब रविवार को इस महायज्ञ का वह पल आने वाला है जिसका इंतजार हर आंख को है। दसवें दिन रविवार को कुंभकरण-मेघनाद वध, लंकापति रावण के अंत और प्रभु श्रीराम के अयोध्या आगमन के साथ भव्य राज्याभिषेक का ऐसा अलौकिक दृश्य सजेगा, जो श्रद्धालुओं की स्मृतियों में स्थायी हो जाएगा।

समिति के तत्वावधान में आगामी 20 अक्टूबर को विजयदशमी के पावन पर्व पर सेक्टर-14 में भव्य रावण दहन का कार्यक्रम होगा। इस आयोजन के लिए शनिवार को भूमि पूजन किया गया। भूमि पूजन वाल्मीकि समाज की प्रतिनिधि श्रीमती शांता बाई व श्रीमती तुलसीबाई ने किया। इस अवसर पर नगजीराम मीणा ने श्रीफल बधारकर व गैंती चलाकर कार्य का शुभारंभ किया।

आयोजन समन्वयक अशोक बाबेल ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए 'वृक्षम अमृतम सेवा संस्थान' की ओर से रामलीला आयोजन स्थल पर 201 तुलसीजी के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. गोपेश शर्मा, कमला शर्मा, अनिल पारिख, यशवंत त्रिवेदी व मनोज आंचलिया ने इस पुण्य कार्य में सहयोग प्रदान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता

Livevns.news Desk
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