पुष्कर से शुरू हुई लोकमंथन यात्रा, लोक परंपराओं और संस्कृति की झलक ने मोहा मन

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पुष्कर से शुरू हुई लोकमंथन यात्रा, लोक परंपराओं और संस्कृति की झलक ने मोहा मन


अजमेर, 08 अक्टूबर (हि.स.)। लोक परंपराओं, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के उद्देश्य से लोकमंथन यात्रा के तीसरे चरण की शुरुआत गुरुवार को पुष्कर से हुई। चित्तौड़ प्रांत की यह यात्रा 8 अक्टूबर से शुरू होकर 21 अक्टूबर को झालावाड़ में सम्पन्न होगी। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर लोक संस्कृति, परंपरा, शिक्षा, साहित्य, संविधान और खेलों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

यात्रा की शुरुआत सुबह ब्रह्मा मंदिर में दर्शन और पुष्करराज की पूजा-अर्चना के बाद हुई। इसके बाद वाहन रैली के रूप में यात्रा पुष्कर मार्ग स्थित आदर्श विद्या निकेतन होते हुए अजमेर के रीजनल कॉलेज तिराहे पर पहुंची, जहां यात्रा का भव्य स्वागत किया गया।

इसके बाद यात्रा राजकीय कन्या महाविद्यालय पहुंची। यहां विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनियां आयोजित की गईं। अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ, संस्कार भारती, संस्कृत भारती सहित विभिन्न संगठनों ने लोक परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

कलाकारों ने लोक वाद्य, लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुतियां देकर भारतीय संस्कृति के रंग बिखेरे।

कार्यक्रम के दौरान ‘पधारो म्हारे देश’ लोकगीत की मनमोहक प्रस्तुति ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं क्रीड़ा भारती की ओर से सतोलिया, लट्टू, लंगड़ी टांग, रस्साकशी, खो-खो और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में लोक कलाकारों का स्वागत और सम्मान भी किया गया।

यात्रा में जोधपुर से आए हरदयाल और जसवंत खत्री सपत्नीक शामिल रहे। यात्रा के दौरान नवीन न्यायालय परिसर के बाहर अधिवक्ताओं ने भी इसका स्वागत किया। इसके बाद यात्रा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड सभागार पहुंची।

राजीव गांधी सभागार में अधिवक्ता परिषद और राजस्थान ह्यूमन रिसोर्सेज डेवलपमेंट फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम में जयपुर से आए जसवंत खत्री मुख्य वक्ता रहे, जबकि अध्यक्षता जगदीश सिंह राणा ने की।

जसवंत खत्री ने कहा कि लोकमंथन यात्रा लोक परंपराओं को समाज की मुख्य धारा में स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने भारतीय लोक जीवन, परंपराओं और संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

यात्रा के संयोजक डॉ. सत्यनारायण कुमावत ने कहा कि ‘हम भारत के लोग’ केवल संविधान में लिखे शब्द नहीं हैं, बल्कि देश की सामूहिक शक्ति और एकता का आधार हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सभी नागरिक मिलकर राष्ट्र की आधारभूत शक्ति हैं और यात्रा के माध्यम से संविधान में वर्णित ‘हम भारत के लोग’ की भावना और उसकी महत्ता को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

लोकमंथन यात्रा के तीसरे चरण में चित्तौड़ प्रांत के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्रम होंगे। आठ अक्टूबर को पुष्कर-अजमेर से शुरू हुई यात्रा लल्लाई ग्राम, सरवाड़ होते हुए शाम के कार्यक्रम के बाद जालिया-द्वितीय और ब्यावर पहुंची। इसके बाद यात्रा राजस्थान के विभिन्न जिला केंद्रों से होकर आगे बढ़ेगी और 21 अक्टूबर को झालावाड़ में इसका समापन होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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