सरल और स्पष्ट भाषा में बने कानून, तभी झलकेगी जनता की इच्छा : देवनानी

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सरल और स्पष्ट भाषा में बने कानून, तभी झलकेगी जनता की इच्छा : देवनानी


जयपुर, 18 अप्रैल (हि.स.)। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून निर्माण की प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है और इसका आधार मजबूत विधायी मसौदा होता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि विधेयकों की भाषा सरल, स्पष्ट और आमजन के लिए समझने योग्य होनी चाहिए, ताकि उसमें जनता की वास्तविक इच्छाएं और अपेक्षाएं प्रतिबिंबित हो सकें।

वे शनिवार को राजस्थान विधानसभा में आयोजित 37वें अंतरराष्ट्रीय विधायी मसौदा (इंटरनेशनल लेजिस्लेटिव ड्राफ्टिंग) प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में बांग्लादेश, भूटान, घाना, केन्या, श्रीलंका, तंजानिया और जाम्बिया सहित कुल 17 देशों के 43 प्रतिभागियों ने भाग लेकर भारत की विधायी प्रक्रिया को नजदीक से समझा।

देवनानी ने अपने संबोधन में विधेयक पारित करने की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि पहला चरण विधेयक को सदन में प्रस्तुत करना होता है, इसके बाद दूसरे चरण में उस पर गहन चर्चा की जाती है, जिसमें प्रायः विशेष समितियों के माध्यम से हर पहलू का विश्लेषण किया जाता है। अंत में तीसरे चरण में विधेयक को मतदान के लिए रखा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जनहित सर्वोपरि रहते हैं।

उन्होंने कहा कि “स्पष्ट और सरल भाषा ही न्याय का सार है।” यदि कानून जटिल भाषा में होंगे तो आमजन के लिए उन्हें समझना कठिन होगा, जिससे उनके उद्देश्य पर असर पड़ सकता है। इसलिए कानून निर्माण में भाषा की सरलता और स्पष्टता बेहद आवश्यक है। राजस्थान विधानसभा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए देवनानी ने इसे “लोकतंत्र का सच्चा मंदिर” बताया। उन्होंने कहा कि 200 सदस्यों वाली यह विधानसभा राज्य की जनता की आकांक्षाओं को कानून का रूप देती है। वर्तमान में विधानसभा अपनी स्थापना की 75वीं वर्षगांठ मना रही है, जो इसकी समृद्ध लोकतांत्रिक परंपरा और विकास यात्रा का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि भारत आजादी के 75 वर्ष पूरे कर “अमृतकाल” की ओर अग्रसर है और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में विधायिकाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे नीतियों और कानूनों के माध्यम से देश के भविष्य को दिशा देती हैं। देवनानी ने यह भी बताया कि राजस्थान विधानसभा ने अपने सभी विधायी अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर आधुनिक तकनीक को अपनाया है। इससे न केवल कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही भी मजबूत हुई है। पारंपरिक राजस्थानी स्थापत्य और आधुनिक सुविधाओं के समन्वय से बना विधानसभा भवन देशभर के लिए एक आदर्श के रूप में उभरा है।

उन्होंने विधानसभा के डिजिटल संग्रहालय का उल्लेख करते हुए कहा कि यह युवाओं और आमजन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। यहां लोग राज्य की विधायी यात्रा, इतिहास और कानून निर्माण की प्रक्रिया को आसानी से समझ सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान विदेशी प्रतिभागियों ने विधानसभा के सदन, भवन और संग्रहालय का भ्रमण किया तथा वरिष्ठ विधायकों और विशेषज्ञों के साथ संवाद भी किया। इस संवाद से उन्हें भारतीय संसदीय परंपराओं और विधायी प्रक्रियाओं की गहराई से जानकारी मिली।

देवनानी ने प्रतिभागियों से कहा कि ऐसे कार्यक्रम केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि अनुभव आधारित सीख प्रदान करते हैं, जो वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने में सहायक होते हैं।

उन्होंने “पधारो म्हारे देश” की भावना के साथ भारत की संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को समझने का आमंत्रण भी दिया।

इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष, विभिन्न विधायक, विधानसभा के वरिष्ठ अधिकारी और लोकसभा सचिवालय से जुड़े अधिकारी भी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संसदीय सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित

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