लेक्चरर के ट्रांसफर से नाराज बच्चे, स्कूल के बाहर काटी पूरी रात

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लेक्चरर के ट्रांसफर से नाराज बच्चे, स्कूल के बाहर काटी पूरी रात


लेक्चरर के ट्रांसफर से नाराज बच्चे, स्कूल के बाहर काटी पूरी रात


भीलवाड़ा, 13 जनवरी (हि.स.)। भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी ब्लाॅक के नंदराय कस्बे में शिक्षा और गुरु-शिष्य परंपरा का ऐसा भावुक दृश्य सामने आया, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक स्कूल नंदराय में कार्यरत भूगोल के लेक्चरर शंकरलाल जाट के ट्रांसफर के विरोध में छात्र-छात्राएं कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठ गए। सोमवार शाम शुरू हुआ यह आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहा, जब तापमान महज 8 डिग्री के आसपास था।

जानकारी के अनुसार 11 जनवरी को शंकरलाल जाट का तबादला आदेश जारी हुआ। जैसे ही इसकी खबर छात्रों तक पहुंची, उनमें आक्रोश फैल गया। सोमवार शाम करीब 4 बजे छात्र-छात्राएं स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए। घंटों बीत जाने के बावजूद जब कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनकी बात सुनने नहीं पहुंचा, तो बच्चों ने वहीं पर खाना खाया और स्कूल गेट के बाहर ही टेंट लगाकर रात गुजार दी।

सर्द हवा, ठिठुरन और अंधेरी रात के बीच बच्चों का यह संकल्प बेहद मार्मिक था। धरने की सूचना मिलते ही ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी बच्चों का साथ दिया। किसी ने भोजन की व्यवस्था की तो किसी ने कंबल और बिस्तर पहुंचाए। यह दृश्य न सिर्फ विरोध का, बल्कि सामूहिक संवेदना और एकजुटता का भी प्रतीक बन गया।

मंगलवार सुबह तक धरना जारी रहा। स्कूल में पढ़ने वाले करीब 600 विद्यार्थियों में से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौके पर पहुंचीं और आंदोलन में शामिल हुईं। स्कूल पर ताला लगा रहा और बच्चे बाहर बैठकर नारेबाजी करते रहे। नाश्ता और दोपहर का भोजन भी स्कूल परिसर के बाहर ही किया गया, लेकिन किसी के कदम पीछे नहीं हटे।

धरने पर बैठे छात्रों का कहना था कि वे सोमवार से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। जब तक शंकरलाल जाट का ट्रांसफर निरस्त नहीं होता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो वे आमरण अनशन जैसा कठोर कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

छात्र अनिल अहीर ने बताया कि शंकरलाल जाट सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि अभिभावक की तरह मार्गदर्शन देने वाले हैं। उन्होंने गत सत्र में बोर्ड परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को अपने खर्चे पर हवाई यात्रा करवाई थी। इतना ही नहीं, स्कूल भवन की जर्जर हालत सुधारने के लिए उन्होंने भामाशाहों से संपर्क कर मरम्मत कार्य भी करवाया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मूलचंद

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