कृष्ण जन्मोत्सव,नंदोत्सव और रामकथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

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कृष्ण जन्मोत्सव,नंदोत्सव और रामकथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब


जयपुर, 12 जून (हि.स.)। राजधानी के विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर चल रही कथाओं में शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, नंदोत्सव और रामकथा प्रसंग श्रद्धा, उल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाए गए। भजन, कीर्तन, झांकियों और आध्यात्मिक प्रवचनों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

मंदिर श्री गीता गायत्री जी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। पंडित राजकुमार चतुर्वेदी के सानिध्य एवं वृंदावन धाम के कथावाचक पंडित श्याम नारायण शास्त्री के प्रवचनों के बीच बालकृष्ण प्राकट्य की मनोहारी झांकी प्रस्तुत की गई। मंदिर को रंग-बिरंगी झालरों, पताकाओं और गुब्बारों से सजाया गया। “यशोदा मैया दे दो बधाई” और “यशोदा के हुआ लाला” जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। भगवान शिव के आगमन की झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि आगामी दिनों में गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाएगा।

वहीं छोटी चौपड़ स्थित मंदिर श्री सीताराम जी में पुरुषोत्तम मास के तहत आयोजित नौ दिवसीय भागवत कथा में कथा व्यास आशीष महाराज ने श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण ने कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए अवतार लिया। कथा के दौरान 121 पोथी आचार्यों का सम्मान कर पुष्पवर्षा की गई। आशीष महाराज ने कहा कि गुरु की शरण में ही भगवान के साक्षात दर्शन संभव हैं और मनुष्य को युवावस्था से ही भक्ति मार्ग अपनाना चाहिए।

ब्रह्मपुरी रोड स्थित मंगोड़ी वालों की बगीची में सखी सहेली महिला मंडल की ओर से आयोजित श्रीराम कथा में व्यासपीठ से अकिंचन महाराज ने केवट प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में ऊंच-नीच और भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं है। व्यक्ति की महानता उसके जन्म या जाति से नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम के प्रति उसकी श्रद्धा और भक्ति से निर्धारित होती है। उन्होंने कहा कि भक्ति, मुक्ति और मोक्ष से भी श्रेष्ठ है तथा हमारे वेद-पुराण समरसता और समानता का संदेश देते हैं।

उधर विद्याधर नगर सेक्टर-दो स्थित उत्सव सामुदायिक केंद्र में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में नंदोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। वृंदावन धाम के कथावाचक अनिल कृष्ण शास्त्री महाराज ने भगवान राम और श्रीकृष्ण के अवतारों की महत्ता बताते हुए धर्म स्थापना का संदेश दिया। “नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की” और “प्रगटे हैं कुंवर कन्हाई” जैसे बधाई गीतों के बीच फल, खिलौने, टॉफियां और चॉकलेट की उछाल की गई। कथा में विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

मानसरोवर स्थित वेदना निवारण केंद्र में आयोजित श्रीमद् पावन प्रज्ञा पुराण कथा में गोपाल स्वामी ने आत्मपरिवर्तन और नैतिक मूल्यों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति स्वयं को बदलने के लिए तैयार नहीं होता, तब तक कोई भी उसका कल्याण नहीं कर सकता। उन्होंने युगऋषि का संदेश दोहराते हुए कहा, “हम बदलेंगे, युग बदलेगा।” कथा से पूर्व वेदमाता गायत्री और गुरु सत्ता का पूजन किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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