किसानों के बीच जागरूकता फैलाकर ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान

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किसानों के बीच जागरूकता फैलाकर ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान


बीकानेर, 25 जून (हि.स.)। भारत सरकार के ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी), बीकानेर के वैज्ञानिकों द्वारा राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 75 विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों ने सहभागिता की।

इस अवसर पर केन्द्र के वैज्ञानिक एवं इस अभियान के आयोजन सचिव डॉ. बी. श्रीशैलम ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग का प्रभाव केवल मृदा पर ही नहीं, बल्कि मानव एवं पशु स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी से ही सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पादन संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे किसानों के बीच जागरूकता फैलाकर ‘खेत बचाओ अभियान’ को जन-आंदोलन बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

डॉ. राजेन्द्र कुमार पुरोहित, प्राचार्य, राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर ने कहा कि मृदा संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा पर्यावरणीय जागरूकता के संदेश को समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया। साथ ही एनआरसीसी द्वारा इस अभियान को लेकर सक्रियता की प्रशंसा करते हुए इसे समय की मांग बताया।

केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र कुमार ने मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि खेती में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मृदा की उर्वरा शक्ति को भी दीर्घकाल तक संरक्षित रखा जा सकता है।

केन्द्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया ने वैज्ञानिकों के माध्यम से अपनी बात में कहा कि भारत सरकार का ‘खेत बचाओ अभियान’ मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि एनआरसीसी के वैज्ञानिक किसानों के साथ-साथ युवाओं एवं विद्यार्थियों तक भी अभियान का संदेश पहुंचा रहे हैं, ताकि वैज्ञानिक जानकारी का व्यापक प्रसार हो और अधिकाधिक किसान इस अभियान से लाभान्वित हो सकें। उन्होंने अभियान को सफल बनाने हेतु सभी वर्गों की सक्रिय सहभागिता पर बल दिया।

डॉ. अन्नाराम शर्मा, विभागाध्यक्ष, हिन्दी साहित्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति में भूमि को माता का स्वरूप माना गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति, मृदा एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनकर समाज में सकारात्मक जागरूकता का प्रसार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों एवं स्टाफ गण ने अभियान को समयानुकूल एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए इसकी सराहना की।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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