खेजड़ी संरक्षण की मांग को लेकर बीकानेर में अनिश्चितकालीन अनशन तीसरे दिन भी जारी
बीकानेर, 04 फरवरी (हि.स.)। खेजड़ी संरक्षण की मांग को लेकर बीकानेर में चल रहा अनिश्चितकालीन अनशन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। बिश्नोई धर्मशाला के सामने स्थित पब्लिक पार्क में 450 से अधिक पर्यावरण प्रेमी, बड़ी संख्या में संत और करीब 50 महिलाएं आंदोलन में डटी हुई हैं। कुछ आंदोलनकारी खुद को लोहे की रेलिंग से बांधकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
अनशन पर बैठे धवा डोली मठ के महंत संत लाल दास की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एंबुलेंस से पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। मीडिया संयोजक रवि बिश्नोई ने बताया कि संत लाल दास को ब्रेन से संबंधित समस्या हुई है। उनकी हालत को देखते हुए प्रशासन और चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर है।
सच्चिदानंद महाराज के नेतृत्व में बड़ी संख्या में संत अनशन पर बैठे हैं। संतों का कहना है कि सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि अन्न-जल त्याग कर बैठे लोगों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। यदि मांगों पर निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अनशन के दौरान पर्यावरण प्रेमी महेंद्र कुमार आंखों पर पट्टी बांधकर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि निर्णय होने तक पट्टी नहीं खोलेंगे। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर ठोस फैसला होने तक अनशन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कलेक्ट्रेट कार्यालय और बिश्नोई धर्मशाला के बाहर करीब डेढ़ हजार पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) चक्रवर्ती सिंह और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) बनवारी लाल धरना स्थल के आसपास मौजूद हैं। एसपी कावेंद्र सिंह सागर ने बताया कि पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अनशनकारियों की संख्या और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए बिश्नोई धर्मशाला में 100 बेड का अस्थायी अस्पताल बनाया गया है। चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक देवेंद्र चौधरी ने बताया कि अब तक 50 से अधिक बेड लगाए जा चुके हैं। सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध के अनुसार सभी अनशनकारियों की नियमित जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर उन्हें भर्ती किया जा रहा है।
फलोदी जिले से आए श्यामलाल ने बताया कि उन्होंने जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति को पत्र भेजा है। पत्र में संतों के आमरण अनशन का उल्लेख करते हुए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई है। धरना स्थल पर बैठी महिलाओं ने कहा कि संतों की बिगड़ती हालत से वे व्यथित हैं और सरकार के निर्णय तक आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन से जुड़े रामगोपाल बिश्नोई ने बताया कि बुधवार शाम को मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जो धरना स्थल से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस धरना स्थल पर पहुंचेगा।
उल्लेखनीय है कि खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष होने के साथ-साथ मरुस्थलीय पारिस्थितिकी, जैव विविधता और ग्रामीण आजीविका का प्रमुख आधार है। विशेषज्ञों के अनुसार खेजड़ी का अंधाधुंध कटाव मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया को तेज करता है, भू-जल स्तर घटाता है, भूमि की उर्वरता कम करता है तथा तापमान वृद्धि और सूखे की आशंका बढ़ाता है। इसे देखते हुए पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने खेजड़ी संरक्षण को लेकर प्रमुख माँगें उठाई हैं, जिनमें खेजड़ी के लिए पृथक ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लागू करना, राजस्थान सरकार द्वारा खेजड़ी को विशेष संरक्षित वृक्ष घोषित करना, राजस्थान टेनेंसी अधिनियम, 1955 में आवश्यक संशोधन कर 100 वर्षों से अधिक आयु के खेजड़ी वृक्षों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना, अवैध कटाई पर कठोर दंड और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना, तथा सौर व अन्य विकास परियोजनाओं में खेजड़ी संरक्षण को अनिवार्य शर्त के रूप में शामिल करने की माँग प्रमुख है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर

