ख्वाजा अजमेर की दरगाह के खादिमों ने लाइसेंस के लिए नहीं किया आवेदन

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ख्वाजा अजमेर की दरगाह के खादिमों ने लाइसेंस के लिए नहीं किया आवेदन


अजमेर, 5 जनवरी (हि.स.)। अजमेर स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के तकरीबन 3 हजार खादिमों को लाइसेंस जारी करने के मामले में दरगाह कमेटी की ओर से निर्धारित आवेदन की सोमवार को अंतिम ति​थि बीतने तक किसी भी खादिम ने लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया। लाइसेंस के मामले में अब तक दरगाह कमेटी की ओर से कई बार बैठक आयोजित कर खादिमों को आमंत्रित किए जाने के बाद भी कोई नहीं आया। कमेटी ने इस मामले में विधिक राय लेकर खादिमों को विज्ञापन के जरिए अंतिम तिथि तक आवेदन की सूचना भी दी किन्तु अंजुमन सैयद जादगान और अंजुमन शेख जादगान में से किसी ने भी आवेदन करने में रुचि नहीं दिखाई।

केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली दरगाह कमेटी के नाजिम बिलाल खान का प्रयास था कि ख्वाजा का 814 वां उर्स शुरू होने से पहले दरगाह के तीन हजार खादिमों को लाइसेंस दे दिए जाएं। ताकि उर्स में दरगाह के अंदर जायरीन के लिए अच्छे इंतजाम हो सके। खादिम दरगाह के अंदर अपना पहचान पत्र लेकर आए इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे रखे हैं। खादिमों को पहचान पत्र (लाइसेंस) देने के लिए अजमेर की जिला अदालत में मामला भी लंबित है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश है, इसलिए दरगाह कमेटी के नाजिम बिलाल खान अपनी ओर से कोई कोताही बरतना नहीं चाहते थे लेकिन वहीं दूसरी ओर खादिमों ने स्पष्ट कर दिया था कि ख्वाजा के उर्स से पहले खादिम समुदाय पहचान पत्र लेने का कोई काम नहीं करेगा। अब जबकि ख्वाजा गरीब नवाज का उर्स भी शांति पूर्वक सम्पन्न हो गया है और आवेदन की अंतिम ति​थि भी सोमवार को पूरी हो गई किसी भी खादिम ने आवेदन नहीं कर अपना रुख साफ कर दिया है कि वे लाइसेंस की परिपाटी दरगाह में लागू ही नहीं करना चाहते।

इसके विपरीत खादिम समुदाय ने तो अंजुमन के अध्यक्ष गुलाम किबरिया, उपाध्यक्ष सैयद कलिमुददीन चिश्ती, सैयद हसन हाशमी, असलम हुसैन, मुनव्वर चिश्ती, गफ्तार हुसैन, एहतेशाम अहमद चिश्ती, अंजुमन शेखजादगान के सचिव शेख इजहार चिश्ती आदि के साथ बैठक कर दरगाह कमेटी पर ही आरोप लगाया था कि कमेटी उर्स से पहले दरगाह में माहौल खराब करना चाहती है, इसलिए खादिमों को लाइसेंस देने, दरगाह के अंदर कथित अतिक्रमण हटाने जैसे मुद्दों पर उठाया जा रहा है। जबकि खादिम समुदाय तो जिला प्रशासन और दरगाह कमेटी के साथ मिलकर उर्स में आने वाले जायरीन की सुविधा के लिए काम करना चाहता है। उन्होंने कहा कि दरगाह कमेटी की पहली प्राथमिकता ख्वाजा साहब के सालाना उर्स की शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की होनी चाहिए। अब जबकि उर्स पूरा हो गया तो भी खादिमों ने लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं किया उलटा स्पष्ट मना ही कर दिया कि कोई आवेदन नहीं लेगा।

दरगाह कमेटी के नाजिम बिलाल खान और सहायक नाजिम डॉ. मोहम्मद आदिल का कहना है कि कमेटी जो भी कार्य कर रही है, वह न्यायिक आदेशों के तहत है। चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने दरगाह कमेटी को आदेश दिए हैं, इसलिए कमेटी दरगाह खादिमों को पहचान पत्र देने की प्रक्रिया कर रही है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट के आदेशों, केंद्र व राज्य सरकार, जिला प्रशासन, दरगाह सुरक्षा अंकेक्षण रिपोर्ट तथा अन्य संबंधित रिपोर्टों एवं सिफारिशों के अनुपालन में यह कवायद की जा रही है।

लाइसेंस के लिए दरगाह ख्वाजा साहब अधिनियम 1955 की धारा 11 (एफ) में वर्णित प्रावधानों के अनुसार ही कार्यवाही की जा रही है। एक्ट के अनुसार दरगाह से संबद्ध खादिम समुदाय के दायित्व, कर्तव्य, पहचान, मानक प्रक्रिया, हित एवं सुविधाओं तथा जायरीन की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए खादिमों को लाइसेंस जारी किए जाने है। इसके लिए पात्र खादिम समुदाय के सदस्यों से लाइसेंस आवेदन आमंत्रित किए गए थे पर किसी ने आवेदन नहीं किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष

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