काशी साहित्य वृंद धर्मराज सिंह ठाकुर को साहित्य शिल्पी सम्मान
बीकानेर, 01 नवंबर (हि.स.)। राष्ट्रीय कवि चौपाल 592 वीं कड़ी विश्व शाकाहार दिवस एवं विश्व लेखक दिवस को समर्पित रही। आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता में वंदे मातरम् मंच के संस्थापक अध्यक्ष विजय कोचर माैजूद रहे। मुख्य अतिथि में काशी से पधारे युवा कवि धर्मराज सिंह ठाकुर, विशिष्ट अतिथि में डॉ मोहम्मद फारूक चौहान, सरदार अली परिहार मंच पर सुशोभित हुए।
कोचर ने कहा कि साहित्यकार लेखन के माध्यम से संस्कृति संरक्षण करते हैं जो इतिहास परक है मुख्य अतिथि धर्मराज सिंह ठाकुर काव्य धारा में मन के अभिव्यक्ति इस तरह दी.. देखते देखते क्या से क्या हो गया जो गुनहगार था देवता हो गया..इक दीया मैने रखी थी दहलीज पर और सूरज सवेरे खफा हो गया।
विशिष्ट अतिथि डॉ मोहम्मद फारूक चौहान ने बताया कि साहित्यकारों के लिए राष्ट्रीय कवि चौपाल मंच स्वयं में प्रेरणा का मंच है।
इसी बीच राष्ट्रीय कवि चौपाल समूह द्वारा साहित्य स्नेहिल धर्मराज सिंह ठाकुर का सम्मान प्रशस्ति पत्र, रत्न जड़ित मोतीयन माला श्री फल शाॅल एवं पुष्प मालाएं आदि से आत्मीय स्वागत किया गया।
आज़ के कार्यक्रम में 15 प्रस्तुतियां हुई तथा कार्यक्रम में चंद्र शेखर सेवग, राधा किशन सोनी, राजू लखोटिया, सिराजुद्दीन भुट्टा, छोटू खां, घनश्याम सौलंकी, नासिर, नाथू, जरीन, काजल आदि कई गणमान्य साहित्यानुरागी उपस्थित रहे। कार्यक्रम संचालन चुटिले शायराने रसीले अंदाज में कैलाश टाक ने किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

