यूजीसी नियमों के विरोध पर करणी सेना का सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम

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यूजीसी नियमों के विरोध पर करणी सेना का सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम


जयपुर, 04 अगस्त (हि.स.)। यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर निकाली गई 'सवर्ण न्याय यात्रा' के दौरान जयपुर में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर श्री राजपूत करणी सेना ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने मंगलवार को सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। इसके अलावा राजस्थान बंद का आह्वान होगा और आगामी निकाय व पंचायत चुनावों में भाजपा के खिलाफ घर-घर जाकर प्रचार किया जाएगा।

मकराना ने आरोप लगाया कि करणी सेना ने यूजीसी नियमों के विरोध में 24 दिनों तक करीब 800 किलोमीटर की पदयात्रा कर 50 से 60 कस्बों में लोगों को जागरूक किया। जयपुर पहुंचने से पहले कई दिनों तक प्रशासन से वार्ता चलती रही। प्रशासन शहर के बाहर ज्ञापन लेने पर अड़ा था, जबकि संगठन जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपना चाहता था।

उन्होंने कहा कि प्रशासन ने पानीपेच चौराहे तक जाने की अनुमति दी थी। लेकिन कालवाड़ पुलिया के नीचे पहुंचते ही बिना किसी चेतावनी के प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन चला दिया गया और लाठीचार्ज किया गया। मकराना का आरोप है कि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों पर भी बल प्रयोग किया गया, जबकि आंदोलन पूरी तरह गांधीवादी तरीके से हो रहा था और प्रदर्शनकारी हाथों में गीता और संविधान लेकर चल रहे थे।

मकराना ने दावा किया कि वाटर कैनन की चपेट में आने से देवराज सिंह पलाड़ा घायल हुए। घर पहुंचने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और सीने में दर्द की शिकायत पर पहले उन्हें निजी अस्पताल और बाद में एसएमएस अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि देवराज सिंह रावणा राजपूत समाज से थे और ओबीसी वर्ग से आते थे।

करणी सेना ने इस मामले में एडिशनल एसपी बजरंग सिंह, डीवाईएसपी बी.एल. मीणा तथा एसएचओ गुरु भूपेंद्र को निलंबित करने की मांग की है। साथ ही मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देने की मांग भी रखी है।

मकराना ने कहा कि यदि सात दिन में सरकार वार्ता नहीं करती और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तो करणी सेना मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगी। साथ ही राजस्थान बंद का आह्वान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि निकाय और पंचायत चुनावों में संगठन भाजपा के खिलाफ जनसंपर्क अभियान चलाकर लोगों से भाजपा को वोट नहीं देने की अपील करेगा।

उन्होंने सरकार के साथ-साथ विपक्ष पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान न तो सत्ता पक्ष का कोई बड़ा नेता प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचा और न ही विपक्ष ने उनका पक्ष सुना। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने सरकार के समक्ष आंदोलनकारियों की गलत छवि प्रस्तुत की, जिसके कारण शांतिपूर्ण पदयात्रा पर बल प्रयोग किया गया।

मकराना ने कहा कि करणी सेना का आंदोलन यूजीसी के प्रस्तावित नियमों को वापस लेने, पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होने तक जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया जाएगा। इसके तहत राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी पदयात्राएं निकाली जाएंगी और बाद में दिल्ली कूच कर केंद्र सरकार के समक्ष भी मांगें रखी जाएंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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