कर्मयोगी का मूल मंत्र केवल दायित्व-निर्वहन नहीं, बल्कि जनहित के प्रति समर्पण

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कर्मयोगी का मूल मंत्र केवल दायित्व-निर्वहन नहीं, बल्कि जनहित के प्रति समर्पण


बीकानेर, 09 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर में एक दिवसीय राष्ट्रीय कर्मयोगी जन सेवा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संस्थान के कार्मिकों में जनसेवा की भावना, कार्यकुशलता, उत्तरदायित्व तथा नागरिक-केंद्रित शासन की समझ को सुदृढ़ करना था।

कार्यक्रम के मुख्य अध्यक्ष, संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने अपने उद्बोधन में सरकारी सेवाओं में निष्ठा, पारदर्शिता और सेवाभाव के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्मयोगी का मूल मंत्र केवल दायित्व-निर्वहन नहीं, बल्कि जनहित के प्रति समर्पण है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी, प्रशासनिक एवं कुशल श्रेणी के कर्मचारियों ने सक्रिय सहभागिता की। सत्रों के दौरान मिशन कर्मयोगी की अवधारणा, कार्य-दक्षता, नैतिक मूल्यों, उत्तरदायित्व तथा प्रभावी सार्वजनिक सेवा वितरण पर सार्थक विमर्श हुआ।

कार्यक्रम के लीड ट्रेनर के रूप में इंद्र भूषण कुमार, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, आईसीएआर -केंद्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर ने मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने सरकारी सेवाओं में कर्मयोगी दृष्टिकोण, सतत क्षमता निर्माण तथा सुशासन की भूमिका पर प्रेरक विचार साझा किए।

प्रशिक्षण का सुव्यवस्थित संचालन एवं सुविधा राम पाल वर्मा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, तथा डॉ. बी. आर. चौधरी, प्रधान वैज्ञानिक, द्वारा किया गया, जिससे प्रतिभागियों की संवादात्मक सहभागिता सुनिश्चित हुई।

समग्र रूप से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरक रहा। प्रतिभागियों से प्राप्त सकारात्मक प्रतिक्रिया ने इसकी प्रासंगिकता और प्रभावशीलता को रेखांकित किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

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