जोधपुर के अस्पतालों की ओपीडी में बढ़ रहे टीबी के मरीज
जोधपुर, 19 जनवरी (हि.स.)। शहर के सरकारी अस्पतालों में इन दिनों टीबी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कमला नेहरू चेस्ट एंड टीबी हॉस्पिटल में पूरे संभाग से मरीज पहुंच रहे हैं।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. सीआर चौधरी ने बताया कि टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है। इससे बचने के लिए जागरूक रहें, और लक्षण दिखते ही सरकारी अस्पताल पहुंचें। उन्होंने बताया टीबी के शुरुआती लक्षण बुखार के साथ लगातार खांसी है, जो सामान्य सर्दी-जुकाम जैसा लग सकता है।
डॉ. चौधरी ने चेतावनी दी कि अगर घर के किसी सदस्य को 15 दिन से ज्यादा खांसी, सीने में दर्द, वजन घटना, रात में पसीना आना या थकान हो, तो तुरंत जांच करवाएं। चौधरी ने बताया कि टीबी मुख्यत: फेफड़े को होती है हार्ट की पेरिकार्डियम झिल्ली में टीबी काफी कॉमन होती है। उसमें हार्ट के चारों तरफ की झिल्ली में पानी भर जाता है जिसकी वजह से कई बार पता नहीं चलने से यह गंभीर समस्या हो जाती है। इसके चलते पेट में सूजन आना, पांव में सूजन आने की समस्या शुरू होती है।
वहीं फेफड़ों की टीबी में खांसी में बलगम या खून आना, सांस फूलना जैसी समस्या होती है। इसके अलावा टीबी बच्चेदानी, ब्रेन, स्पाइन, आंखें, किडनी में भी हो सकती है। जैसे ही इसका पता चले सरकारी अस्पताल में दिखाएं। आजकल सभी सरकारी अस्पताल में निशुल्क इलाज उपलब्ध है। यहां फेफड़े, हार्ट, ब्रेन, स्पाइन, किडनी समेत हर प्रकार की टीबी का इलाज होता है। इसलिए टीबी से घबराएं नहीं, क्योंकि इसका इलाज संभव है।
उन्होंने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है। यदि कोई इस मरीज के संपर्क में आता है तो उसे भी होने का खतरा रहता है। इसके लिए मुंह पर मास्क रखें। संक्रमित व्यक्ति के पास हैं तो मुंह ढककर रखें। भीड़ भाड़ वाले इलाकों में सावधानी बरतें। टीबी से बिल्कुल घबराएं नहीं इसका शत प्रतिशत इलाज है। जागरूक रहें।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

