आरटीओ का अल्टीमेटम बेअसर, नियमों की उड़ रही धज्जियां
डेडलाइन खत्म, फिर भी निजी बसों की छतों से नहीं हटे कैरियर और सीढिय़ां
जोधपुर, 3 जनवरी (हि.स.)। प्रादेशिक परिवहन विभाग (आरटीओ) द्वारा चलाए जा रहे सडक़ परिवहन जागरूकता अभियान के बीच नियमों की सख्ती कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है। निजी बसों की छतों से अवैध कैरियर और सीढिय़ां हटाने के लिए दी गई 31 दिसंबर की समय सीमा (डेडलाइन) बीत जाने के बाद भी शहर में धड़ल्ले से इन बसों का संचालन हो रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि विभाग ने कार्रवाई की चेतावनी दी थी, लेकिन अब तक न तो चालान काटे गए और न ही बसें सीज की गईं।
एक ओर जहां निजी बस संचालक आदेशों को ठेंगे पर रख रहे हैं, वहीं रोडवेज प्रशासन ने अपनी बसों की जांच शुरू कर दी है। प्रबंधक यातायात ताराचंद आजाद के नेतृत्व में टीम ने रोडवेज की 103 में से 20 बसों की रेंडम जांच की। इस दौरान फस्र्ट एड बॉक्स, कैरियर और सीढिय़ों की स्थिति जांची गई। इसके विपरीत, शहर के प्रतापनगर, आखलिया चौराहा और बॉम्बे मोटर जैसे इलाकों से संचालित होने वाली करीब 650 निजी बसों पर आरटीओ की नजरें इनायत बनी हुई हैं।
हादसों को न्योता देता ओवरलोड लगेज
नियमों के मुताबिक, बसों की छतों पर कैरियर और सीढिय़ां लगाना प्रतिबंधित है क्योंकि इनसे असंतुलन बिगडऩे और बड़े हादसों का खतरा रहता है। बावजूद इसके, जोधपुर से जैसलमेर, उदयपुर, बाड़मेर और फलोदी जैसे लंबे रूट्स पर चलने वाली बसों में न केवल कैरियर लगे हैं, बल्कि उनमें क्षमता से अधिक सामान (ओवरलोड लगेज) भी लादा जा रहा है।
क्या था आदेश
परिवहन विभाग ने 27 दिसंबर को आदेश जारी कर सभी बस स्वामियों को 31 दिसंबर तक कैरियर हटाने का समय दिया था। आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि पालना न होने पर बसें सीज की जाएंगी। अब देखना यह है कि 31 जनवरी तक चलने वाले इस जागरूकता अभियान में आरटीओ केवल समझाइश तक सीमित रहता है या इन नियम विरुद्ध दौड़ती बसों पर कोई ठोस कार्रवाई भी करता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

