गजनवी ने सोमनाथ तोड़ा, लेकिन भारतीय स्वाभिमान नहीं: शेखावत
केंद्रीय मंत्री ने सोमनाथ मंदिर को भारत के स्वाभिमान का प्रतीक बताया
जोधपुर, 09 जनवरी (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने सोमनाथ मंदिर को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि गजनवी ने मंदिर तोड़ा, लेकिन भारत का स्वाभिमान नहीं तोड़ पाया।
गुरुवार देर रात जोधपुर पहुंचे शेखावत ने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ठीक हजार साल पहले गजनवी के सुल्तान महमूद ने सोमनाथ पर आक्रमण किया था। तीन दिनों के कड़े संघर्ष के बाद 11 जनवरी 1026 को मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया। एक हजार साल में कई हमलावरों ने इसे खंडित करने का प्रयास किया, लेकिन वे भारतीय चेतना को खत्म नहीं कर पाए।
शेखावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से शुरू हुआ सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हमें अपनी ऐतिहासिक विजय और संघर्ष की याद दिलाता है। हजार साल पहले आक्रांताओं ने भारत की संस्कृति को कुचलने का षड्यंत्र रचा था, लेकिन भारत हर बार पूरी ताकत से उठ खड़ा हुआ।
केंद्रीय मंत्री ने आह्वान किया कि सोमनाथ की यह पावन स्मृति हमारे मन में 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को और गहरा करे। उन्होंने भगवान सोमनाथ और द्वारकाधीश के चरणों में प्रार्थना करते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति से भारत पुन: विश्व पटल पर अपनी सांस्कृतिक और आर्थिक संप्रभुता स्थापित करेगा।
स्वतंत्रता के बाद के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए शेखावत ने कहा कि आजादी के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण को रोकने की पूरी कोशिश की। उनके कड़े विरोध के बावजूद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के अटल इरादे और सामाजिक सहयोग से इस गौरव का पुनरुद्धार हुआ। संयोग से इस वर्ष गजनवी के आक्रमण के हजार वर्ष हो रहे हैं, वहीं मंदिर के पुनर्निर्माण के भी 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

