जीवंत हुआ 'टाइगर हिल युद्ध' का पराक्रम : केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले, हथियारों से नहीं, राष्ट्र के संकल्प से जीता गया था कारगिल

WhatsApp Channel Join Now
जीवंत हुआ 'टाइगर हिल युद्ध' का पराक्रम : केंद्रीय मंत्री शेखावत बोले, हथियारों से नहीं, राष्ट्र के संकल्प से जीता गया था कारगिल




जोधपुर, 26 जुलाई (हि.स.)। कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में रविवार को जोधपुर की पावन धरा इतिहास और वर्तमान के एक अद्वितीय व गौरवशाली संगम की साक्षी बनी। क्रीड़ा भारती, जोधपुर प्रांत की मेजबानी में मेहरानगढ़ फोर्ट की तलहटी स्थित रावटी-घोड़ा घाटी की पहाड़ियों में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना द्वारा प्रदर्शित अभूतपूर्व शौर्य और पराक्रम को पुनर्जीवित करने के लिए 'टाइगर हिल युद्ध' का सांकेतिक एवं नियंत्रित पुनर्प्रस्तुतीकरण आयोजित किया गया। इस अनूठे आयोजन में क्रीड़ा भारती ने पूर्व सैनिकों और सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ मिलकर कारगिल की प्रमुख चोटियों पॉइंट 5140, पॉइंट 4875, पॉइंट 5353 और टाइगर हिल पर हुए भीषण संघर्ष और भारतीय सेना की विजय गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं केंद्रीय संस्कृति व पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे के साथ मिलकर कारगिल युद्ध में असाधारण वीरता का परिचय देने वाले 16 वीर सैनिकों को सम्मानित किया। शेखावत ने बेहद भावुक और ओजस्वी शब्दों में वीर सैनिकों के त्याग और राष्ट्रभक्ति को नमन किया। उन्होंने कहा कि हम सभी यहां उस स्वर्णिम इतिहास को अपनी आंखों के सामने पुनः जीवंत करने और उससे प्रेरणा लेने के लिए एकत्र हुए हैं, जिसे हमारे वीरों ने अपने रक्त से लिखा था। कारगिल युद्ध ने पूरी दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि भारत शांति का उपासक तो है, लेकिन यदि कोई हमारी संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देगा तो देश अपने सैनिकों की ताकत के बल पर हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देना जानता है।

समुद्र तल से 16 से 17 हजार फीट की ऊंचाई पर हुए इस युद्ध की विभीषिका का उल्लेख करते हुए शेखावत ने कहा कि दुश्मन ऊंचाई का सामरिक लाभ लेकर पूरी तैयारी के साथ बैठा था। इसके बावजूद माइनस तापमान और अत्यंत विपरीत परिस्थितियों को चुनौती देते हुए भारतीय सेना ने कारगिल की चोटियों पर तिरंगा फहराकर देश के सम्मान को पुनर्स्थापित किया। केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि कारगिल का युद्ध केवल आधुनिक हथियारों की ताकत से नहीं, बल्कि सैनिकों के अदम्य साहस, अनुशासन और मातृभूमि पर सर्वस्व न्योछावर करने की भावना से जीता गया था। कैप्टन विक्रम बत्रा का अमर उद्घोष 'यह दिल मांगे मोर' पूरे भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया। कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज कुमार पांडेय, मेजर विवेक गुप्ता और राइफलमैन संजय कुमार जैसे वीरों ने देश को एक ही सीख दी है 'राष्ट्र सर्वोपरि है'।

इतिहास और संस्कृति की रक्षा पर बल देते हुए शेखावत ने कहा कि किसी भी देश के लिए इतिहास केवल अतीत का पन्ना नहीं, बल्कि भविष्य के निर्माण की आधारभूमि होता है। जब हम इतिहास की घटनाओं को केवल पुस्तकों में पढ़ने के बजाय अपनी आंखों के सामने जीवंत देखते हैं तो वह आने वाली पीढ़ियों के मानस पर गहरा प्रभाव छोड़ती है। जो समाज अपने राष्ट्रनायकों का सम्मान करना बंद कर देता है, वह अपनी जड़ों और प्रेरणास्रोतों से दूर हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प से जोड़ते हुए शेखावत ने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सीमा पर तैनात सैनिक ही नहीं करते। प्रयोगशाला में काम करने वाला वैज्ञानिक, स्टार्टअप शुरू करने वाला युवा, संस्कार देने वाला शिक्षक, खिलाड़ी तैयार करने वाला कोच और निष्ठा से अध्ययन करने वाला छात्र, अपने नागरिक कर्तव्यों का पालन करने वाला हर व्यक्ति राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने आयोजन की सफलता के लिए क्रीड़ा भारती व आयोजन समिति का आभार जताया और व्यस्तता के बावजूद कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए राज्यपाल हरिभाऊ किशनराव बागडे का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में राजस्थान सरकार के मुख्य सचेतक व जालोर विधायक जोगेश्वर गर्ग, क्रीड़ा भारती के राष्ट्रीय मंत्री राज चौधरी, प्रांत अध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह जोधा, पूर्व सैनिक सेवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरपत सिंह सहित बड़ी संख्या में सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक और नागरिक उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजीव

Share this story