हिंदी की सरलता और गरिमा बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी: राठौड़
जोधपुर, 01 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, क्षेत्र-2, जोधपुर में आयोजित हिंदी पखवाड़े का समापन हो गया है। इस अवसर पर राजभाषा समिति की त्रैमासिक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार प्रो. डॉ. महिपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि हिंदी केवल हमारी राजभाषा नहीं, बल्कि हमारे दिल की धडक़न है। कार्यालयीन कार्यों और दैनिक जीवन में हिंदी का प्रयोग करते समय हमें गर्व की अनुभूति होनी चाहिए। हिंदी सरल, सरस और आमजन की भाषा है। प्रो. राठौड़ ने कहा कि आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में हिंदी का व्यापक उपयोग हो रहा है, लेकिन भाषा के मूल स्वरूप और उसकी गरिमा का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। हिंदी को तोड़-मरोडक़र मिश्रित भाषा के रूप में प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति पर विचार करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यूनिकोड के कारण हिंदी आज डिजिटल माध्यमों पर सहजता से उपलब्ध है और यह समय की आवश्यकता भी है। उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रभाव राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निरंतर बढ़ रहा है। भारत सरकार द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। कृषि अनुसंधान से जुड़ी संस्थाओं में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की आवश्यकता है, ताकि किसानों तक कृषि की नवीनतम तकनीकों और अनुसंधान संबंधी जानकारी सहज एवं सरल भाषा में पहुंचाई जा सके।
संस्थान के कार्यवाहक निदेशक एवं राजभाषा अध्यक्ष डॉ. प्रेम पाल रोहिल्ला ने कहा कि सितंबर माह में राजभाषा हिंदी विभाग, नई दिल्ली द्वारा संस्थान को अधिसूचित किया गया है। ऐसे में कार्यालयीन कार्यों और दैनिक जीवन में हिंदी के प्रयोग को और अधिक बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्राचार तथा फाइलों पर टिप्पणियां नियमित रूप से हिंदी में करने से राजभाषा के प्रभावी प्रयोग को गति मिलेगी।
विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित
डॉ. रोहिल्ला ने स्वागत उद्बोधन के साथ हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं का विवरण प्रस्तुत किया तथा राजभाषा समिति की त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। समारोह में मुख्य अतिथि एवं कार्यक्रम अध्यक्ष ने हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान किए। इस अवसर पर वैज्ञानिक बकरी पालन विषय पर प्रकाशित हिंदी पुस्तक का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रधान वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) डॉ. बाबूलाल जांगिड़ ने किया। अंत में राजभाषा सचिव राजेंद्र बैंदा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

