जोधपुर शहर में रही लोटियों की धूम, बेंतमार मेला रविवार को
जोधपुर, 04 अप्रैल (हि.स.)। अखण्ड सौभाग्य, सुहाग व महिला सशक्तीकरण से जुड़ा धींगा गवर मेला रविवार रात श्रद्धा, उल्लास, उमंग व मस्ती के साथ मनाया जाएगा। रविवार की पूरी रात भीतरी शहर की सडक़ों पर महिलाओं का ही राज होगा। इस मेले के लिए इन दिनों तीजणियों का पूजन अंतिम दौर में है।
शनिवार को शहर के अलग-अलग मोहल्लों में पूजन किया गया। वहीं बेंतमार मेले में अलग-अलग रूप धरने की तैयारियां भी शुरू हो गई है। पूजन के 15वें दिन आज तीजणियां पदमसर और रानीसर तालाब से लोटियां भरकर लाई इसके साथ ही भीतरी शहर में एक दर्जन से ज्यादा स्थानों पर मेले के दिन गवर बैठाने के लिए भी तैयारियां जोरों पर है।
सूर्यनगरी में धींगा गवर उत्सव की रंगत परवान पर है। आज तीजणियां ढोल-नगाड़ों के साथ सरोवरों से लोटियां लेकर आई। रविवार रात को महिलाओं को समर्पित अनूठा आयोजन होगा, जिसमें वे गली-मोहल्लों और बाजारों में गवर माता के दर्शन के लिए निकलेंगी। महिलाएं अलग-अलग स्वांग रचकर उत्सव में भाग लेंगी। कोई गवर तो कोई ईसर का रूप धारण करेगी।
हाथी चौक, चाचा की गली और ब्रह्मपुरी में धींगा गवर उत्सव का आयोजन होगा। इस दौरान एक शाम तीजणियों के नाम भजन संध्या भी होगी। हाथी चौक विकास समिति के मेला संयोजक हरीश जोशी ने बताया कि तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गवर माता का स्वर्णाभूषणों से शृंगार कर विराजित किया जाएगा। श्रीमाली ब्राह्मण समाज की ओर से भागीपोल ब्रह्मपुरी में मेला होगा। यहां तीजणियां गवर माता के गीत प्रस्तुत करेंगी और सजी-धजी प्रतिभागियों का सम्मान किया जाएगा। अध्यक्ष महेंद्र बोहरा व सचिव नरेंद्र राज बोहरा ने बताया कि सुरक्षा के लिए वॉलियंटर तैनात किए जाएंगे।
भीतरी शहर में ब्राह्मण व स्वर्णकार समाज सहित विभिन्न समाजों की महिलाएं 16 दिन तक पूजन करती हैं, जिसका समापन धींगा गवर उत्सव के रूप में होगा।
चार प्रहर की आरती के बाद अलसुबह 4 बजे पूजन पूर्ण होगा। सीताराम मंदिर कबूतरों का चौक, जालप मोहल्ला, सुनारों की घाटी, शाहपुरा, छीपों का चौक, नवचौकिया, नायों का बड़, पुंगलपाड़ा, प्रतापनगर, चांदपोल, ब्रह्मपुरी व चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सहित कई क्षेत्रों में सैकड़ों महिलाएं प्रतिदिन 3-4 घंटे पूजन कर रही हैं। रविवार को व्रत पूरा हो जाएगा। इस पूजन में विधवा महिलाएं भी शामिल होती हैं, लेकिन कुंवारी कन्या यह पूजन नहीं करती हैं। सुहाग के पूजन की निशानी उसके हाथ पर बंधा धागा होता है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

