पूर्ववर्ती सरकार ने किया सरकारी खजाने का दुरुपयोग : केबिनेट मंत्री पटेल

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पूर्ववर्ती सरकार ने किया सरकारी खजाने का दुरुपयोग : केबिनेट मंत्री पटेल


जोधपुर, 29 मार्च (हि.स.)। संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान पर तीखा पलटवार किया है। पटेल ने गहलोत के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में सिर्फ होटलों में रहने और सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राज्य में निवेशकों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया और अब उस विषय पर बयान दे रही है, जिनका उन्हें कोई ज्ञान नहीं है।

जोधपुर प्रवास पर आए जोगाराम पटेल ने सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए कहा कि गहलोत को पहले खुद के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनके घर खुद शीशे के होते हैं, उन्हें दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए। मंत्री ने आरोप लगाया कि गहलोत ने अपने पुत्र के लिए कई लोगों का हक मारा है, चाहे वह जोधपुर संसदीय क्षेत्र हो, जालोर-सिरोही सीट हो या अन्य अवसर।

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में आमतौर पर किसी नेता के पुत्र का हस्तक्षेप नहीं होता, लेकिन गहलोत को इस विषय पर आत्ममंथन करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि गहलोत उनके वरिष्ठ हैं और उनका सम्मान करते हैं। इधर, प्रदेश में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पेयजल संकट को लेकर चिंता बढऩे लगी है। मंत्री जोगाराम पटेल ने खुद स्वीकार किया कि विशेष रूप से मारवाड़ और पश्चिमी राजस्थान में हर साल गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत होती है। उन्होंने कहा कि यह समस्या नई नहीं है, लेकिन सरकार इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में है।

पानी की समस्या से राहत देने के लिए विशेष इंतजाम

पटेल के अनुसार, सरकार ने पेयजल आपूर्ति को लेकर कंटीजेंसी प्लान तैयार कर लिया है। इसके तहत गर्मी के दिनों में आमजन को पानी की समस्या से राहत देने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे।

उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और लोगों को पानी की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। वहीं, बार काउंसिल ऑफ राजस्थान में सदस्यों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे पर भी मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब बार काउंसिल की स्थापना हुई थी, तब जितने सदस्य थे, आज भी लगभग उतने ही हैं।

अब तक सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखना है। साथ ही, मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए जजों की संख्या बढ़ाने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे हैं, ताकि आम जनता को समय पर न्याय मिल सके।

हिन्दुस्थान समाचार / सतीश

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